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भारत मंडपम में ‘AI का महाकुंभ’: ढाई लाख पंजीकरण और भविष्य की बदलती तस्वीर

AI का महाकुंभ
AI का महाकुंभ

नई दिल्ली: राजधानी का भारत मंडपम इन दिनों तकनीक और भविष्य की चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। दुनिया की सबसे बड़ी ‘एआई समिट’ के पहले ही दिन जो उत्साह देखने को मिला, उसने यह साबित कर दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) को लेकर न केवल विशेषज्ञों में, बल्कि आम जनता में भी भारी जिज्ञासा है। 16 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस पांच दिवसीय आयोजन ने पहले ही दिन भीड़ के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।

उम्मीद से कहीं ज्यादा भीड़: जब छोटे पड़ गए हॉल
समिट के पहले दिन भारत मंडपम के खचाखच भरे हॉल और लंबी-लंबी कतारें आकर्षण का केंद्र रहीं। आलम यह था कि एक ही समय में 14 समानांतर सत्र (Parallel Sessions) चल रहे थे, फिर भी हर कमरे के बाहर भारी भीड़ जमा थी।

  • पंजीकरण का सैलाब: आयोजकों के अनुसार, इस समिट के लिए 2.5 लाख से भी अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है, जो उम्मीद से कहीं ज्यादा है।
  • हताशा और उत्साह: भीड़ इतनी अधिक थी कि सुरक्षा कारणों से कई हॉल के दरवाजे बंद करने पड़े, जिससे बाहर खड़े सैकड़ों लोगों के बीच तीखी-मीठी नोंकझोंक भी देखने को मिली।

आंकड़ों में दुनिया की सबसे बड़ी समिट
यह आयोजन अपनी भव्यता और भागीदारी के मामले में वैश्विक स्तर पर मील का पत्थर साबित हो रहा है:

  • अवधि: 5 दिन (16 फरवरी से 20 फरवरी)।
  • वक्ता: 3,250 से अधिक वैश्विक विशेषज्ञ।
  • सत्र: लगभग 500 तकनीकी और नीतिगत सत्र।
  • भागीदारी: 600 से ज्यादा स्टार्टअप्स और 13 देशों के समर्पित पवेलियन।

अगले 3 साल और 1000 गुना रफ्तार
सोमवार को हुए विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने एक स्वर में चेतावनी और उम्मीद दोनों साझा कीं। वक्ताओं का मानना है कि अगले तीन वर्षों में हमारी जिंदगी में एआई का दखल 1,000 गुना तेजी से बढ़ेगा। यह बदलाव केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम आदमी के खान-पान, काम करने के तरीके और संवाद को भी पूरी तरह बदल देगा।

नौकरी का संकट या कौशल का अवसर?
एआई के दौर में ‘नौकरी जाने के डर’ पर विशेषज्ञों ने बहुत स्पष्ट और सकारात्मक नजरिया पेश किया। चर्चा का सार कुछ इस प्रकार रहा:

  • स्किल्स ही बचाएंगी करियर: वक्ताओं ने साफ कहा कि नौकरियां उन लोगों की नहीं जाएंगी जो एआई का उपयोग करेंगे, बल्कि उनकी जाएंगी जो नई तकनीक को सीखने से इनकार कर देंगे।
  • अपस्किलिंग है जरूरी: नौकरी बचाने, उसे आसान बनाने और करियर में तरक्की पाने के लिए बस कुछ नई स्किल्स (New Skills) सीखनी होंगी।
  • नया मंत्र: जो लोग समय के साथ खुद को अपडेट करेंगे, नौकरियां उनके पास चलकर आएंगी।

विशेषज्ञ की राय: “एआई इंसानों को रिप्लेस नहीं करेगा, बल्कि एआई का इस्तेमाल करने वाला इंसान उस इंसान को रिप्लेस कर देगा जो एआई नहीं जानता।”

भविष्य की ओर बढ़ते कदम
इस समिट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत एआई क्रांति के केंद्र में रहने को तैयार है। 13 देशों की भागीदारी और सैकड़ों स्टार्टअप्स का जमावड़ा यह दर्शाता है कि एआई केवल एक ‘बजवर्ड’ नहीं, बल्कि आने वाले कल की हकीकत है। अभी अगले चार दिनों में कई और महत्वपूर्ण घोषणाएं और तकनीकी प्रदर्शन होने बाकी हैं, जिन पर पूरी दुनिया की नजर टिकी है।

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