Maharashtra Assembly Budget Session: महाराष्ट्र विधानमंडल का बजट सत्र होली की छुट्टियों के बाद एक नए ‘अनुशासन’ के साथ शुरू होगा ।मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्षी हमलों की धार कुंद करने और सरकार की जवाबदेही तय करने के लिए सभी मंत्रियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अब मंत्रियों के लिए सदन में केवल हाजिरी लगाना काफी नहीं होगा, बल्कि उन्हें कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग लेना होगा।
नया फरमान: ‘2+2’ का फॉर्मूला और ‘5 की सुरक्षा’
मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी निर्देशों के मुताबिक, सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए यह कड़ा रुख अपनाया गया है:
- अनिवार्य उपस्थिति: प्रत्येक मंत्री को विधानसभा और विधान परिषद, दोनों सदनों में प्रतिदिन कम से कम 2-2 घंटे उपस्थित रहना अनिवार्य होगा।
- क्लीयरेंस रोस्टर: मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि सदन में हर समय कम से कम 5 मंत्रियों की मौजूदगी हर हाल में सुनिश्चित की जाए।
- तत्काल जवाब: इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि यदि विपक्ष जनता से जुड़ा कोई भी मुद्दा उठाए, तो संबंधित विभाग का मंत्री या कोई भी वरिष्ठ मंत्री तुरंत और प्रभावी ढंग से सरकार का पक्ष रख सके।
विपक्ष के घेराव और पुराने अनुभवों से लिया सबक
यह कदम पिछले बजट सत्र के दौरान हुई किरकिरी के बाद उठाया गया है।
- पुरानी चूक: पिछले साल मंत्रियों की अनुपस्थिति के कारण कई बार सदन की कार्यवाही रोकनी पड़ी थी या विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल गया था।
- अध्यक्ष की फटकार: तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने भी मंत्रियों की गैरमौजूदगी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे संसदीय मर्यादाओं के खिलाफ बताया था।
- छवि सुधार की कोशिश: मुख्यमंत्री का मानना है कि सदन में मंत्रियों की मौजूदगी से न केवल अनुशासन दिखेगा, बल्कि कार्यवाही में भी तेजी आएगी।
अनुशासन और जवाबदेही का ‘होली गिफ्ट’
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि होली की छुट्टियों के बाद शुरू होने वाली सदन की कार्यवाही में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- विपक्ष को मौका नहीं: अक्सर देखा जाता है कि मंत्रियों की गैर-मौजूदगी में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं मिल पाता, जिससे असहज स्थिति पैदा होती है।
- सुचारू कार्यवाही: मंत्रियों की नियमित उपस्थिति से विधायी कामकाज समय पर पूरा हो सकेगा।
अग्निपरीक्षा पर मंत्री
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस व्यवस्था को सीधे तौर पर ‘अनुशासन और जवाबदेही’ से जोड़ा है। अब देखना यह होगा कि छुट्टियों के बाद जब सदन की घंटी बजेगी, तो मुख्यमंत्री के इन निर्देशों का मंत्रियों पर कितना असर दिखता है और वे विपक्ष के तीखे सवालों का सामना करने के लिए कितने तैयार रहते हैं।
सदन की गरिमा उसकी उपस्थिति में है। मुख्यमंत्री का यह निर्देश न केवल मंत्रियों की जिम्मेदारी तय करेगा, बल्कि संसदीय लोकतंत्र को भी मजबूती प्रदान करेगा।






























