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महाराष्ट्र: 22 दिनों में 11 बाघों की मौत पर हाई कोर्ट सख्त, जनहित याचिका दायर करने के निर्देश

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महाराष्ट्र: राज्य में लगातार हो रही बाघों की मौतों ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केवल 22 दिनों के भीतर 11 बाघों की मौत की पुष्टि के बाद मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जनहित याचिका (PIL) दायर करने के निर्देश दिए हैं।

अदालत ने स्पष्ट किया है कि बाघ जैसे संरक्षित और दुर्लभ वन्यजीवों की इस तरह लगातार हो रही मौतें राज्य के लिए अत्यंत चिंताजनक हैं और इसे किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हाई कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी

नागपुर खंडपीठ ने संबंधित विभागों से सवाल किया है कि इतनी कम अवधि में बाघों की मौत के पीछे क्या कारण हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। अदालत का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी उपाय नहीं किए गए, तो वन्यजीव संरक्षण की पूरी व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

इस मामले के न्यायालय के संज्ञान में आने के बाद वन विभाग और राज्य सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। अब अदालत के समक्ष बाघों की मौतों के कारणों और रोकथाम उपायों पर विस्तृत जवाब पेश करना होगा।

ज्ञानगंगा अभयारण्य से बाघ के पलायन ने बढ़ाई चिंता

बुलढाणा जिले के ज्ञानगंगा अभयारण्य से जुड़ा मामला भी प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गया है। 4 वर्ष पहले यहां T1C1 नाम का बाघ रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गया था। इसके बाद वन विभाग ने पेंच टाइगर प्रोजेक्ट से 36 महीने उम्र के PKT7CP1 बाघ को 3 जनवरी को ज्ञानगंगा अभयारण्य में स्थानांतरित किया।

सुरक्षा के तहत बाघ को जाली से घिरे सीमित क्षेत्र में रखा गया था, लेकिन हाल ही में उसने जाली तोड़ दी और अभयारण्य से बाहर निकल गया। इससे उसके जीवन पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।

हाईवे पर बढ़ा दुर्घटना का खतरा

ज्ञानगंगा अभयारण्य से होकर बुलढाणा-खामगांव राजमार्ग (753E) गुजरता है, जहां भारी और तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में बाघ के सड़क पर आ जाने से दुर्घटना की आशंका काफी बढ़ गई है।

वन विभाग ने आसपास के गांवों के किसानों और नागरिकों को सतर्क रहने की अपील की है। साथ ही, बाघ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस मार्ग पर यातायात नियंत्रण की आवश्यकता भी जताई गई है।

सड़क पर दिखा बाघ का ‘रॉयल वॉक’

भंडारा जिले के अड्याल वनपरिक्षेत्र में एक रोमांचक लेकिन डराने वाली घटना सामने आई है। अड्याल से किटाली मार्ग पर पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास सुबह करीब 6 बजे एक बाघ सड़क पर बेखौफ टहलता नजर आया।

एक वाहन चालक का रास्ता बाघ ने रोक लिया और जंगल से घिरे इलाके में वो सड़क के बीच ऐसे चलता रहा, मानो अपनी सीमा का निरीक्षण कर रहा हो। करीब 15 से 20 मिनट तक बाघ सड़क पर आगे-पीछे घूमता रहा, जिससे चालक को वाहन रिवर्स करना पड़ा।

ये दृश्य जितना आकर्षक था, उतना ही भयावह भी। घटना ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष के खतरे को उजागर किया है। वन विभाग ने इस क्षेत्र में गश्त बढ़ाने की आवश्यकता बताई है।

भंडारा में सूअरों की तस्करी का भंडाफोड़

इसी बीच भंडारा वन विभाग ने सूअरों की तस्करी के एक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये कार्रवाई बेरोडी पुनर्वास क्षेत्र में की गई, जहां आरोपी पिकअप वाहनों के जरिए सूअरों को नागपुर ले जा रहे थे।

वन विभाग ने जाल बिछाकर वाहनों, सूअरों और तस्करों को मौके पर ही पकड़ लिया। बाद में सभी सूअरों को सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ दिया गया। वहीं, आरोपियों के खिलाफ वन अपराध के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

वन्यजीव संरक्षण पर बढ़ती चुनौती

महाराष्ट्र में हाल के घटनाक्रम ये दर्शाते हैं कि वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बाघों की मौत, उनका जंगल से बाहर आना और तस्करी की घटनाएं प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी हैं। अब देखना होगा कि अदालत के निर्देशों के बाद सरकार और वन विभाग इस दिशा में कितने प्रभावी कदम उठाते हैं।

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