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महाराष्ट्र कर्जमाफी: 6.56 लाख किसानों का 7 साल का इंतज़ार होगा खत्म, सरकार ने खोला ₹5,975 करोड़ का पिटारा

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महाराष्ट्र के लाखों किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। साल 2017 में घोषित की गई कर्जमाफी योजना, जो किन्हीं तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से अधर में लटकी थी, अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। विधानसभा में सहकार मंत्री बाबासाहेब पाटील ने स्पष्ट किया है कि सरकार एक भी पात्र किसान को इस लाभ से वंचित नहीं रहने देगी।

आंकड़ों की जुबानी: अब तक की स्थिति

मंत्री पाटील द्वारा सदन में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, ‘छत्रपति शिवाजी महाराज किसान सम्मान योजना (2017)’ के तहत राज्य के कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत देने का लक्ष्य रखा गया था।
कुल पात्र किसान: 50 लाख 60 हजार
लाभान्वित किसान: 44 लाख 4 हजार
शेष पात्र किसान: 6.56 लाख

मंत्री ने स्वीकार किया कि 6.56 लाख पात्र किसान अभी भी अपने हक की कर्जमाफी का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि इन मामलों की स्क्रूटनी और प्रक्रिया तेजी से जारी है।

बजट 2026-27: मिशन मोड में सरकार

इस देरी को कवर करने और शेष किसानों के खातों में राशि हस्तांतरित करने के लिए सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 5,975 करोड़ रुपए का भारी-भरकम प्रावधान प्रस्तावित किया है। यह कदम दर्शाता है कि सरकार पुरानी योजनाओं के बैकलॉग को खत्म कर किसानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराना चाहती है।

देरी के मुख्य कारण और समाधान
सहकार विभाग के सूत्रों के अनुसार, शेष 6.56 लाख किसानों को लाभ न मिल पाने के पीछे कई तकनीकी कारण रहे हैं:
आधार लिंकिंग की समस्या: कई किसानों के बैंक खाते आधार से लिंक नहीं थे।
डाटा मिसमैच: बैंकों द्वारा दिए गए डेटा और सरकारी रिकॉर्ड में विसंगतियां।
मृत किसानों के वारिस: पात्र किसानों की मृत्यु के बाद उनके वारिसों के दस्तावेजों का सत्यापन।

मंत्री पाटील ने बताया कि इन सभी त्रुटियों को दूर करने के लिए जिला स्तर पर विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि जल्द से जल्द ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) के माध्यम से पैसा किसानों तक पहुंचे।

किसानों को क्या होगा लाभ?
इस निधि के प्रावधान से न केवल किसानों का पुराना कर्ज माफ होगा, बल्कि वे नए सिरे से फसली ऋण (Crop Loan) लेने के लिए पात्र हो जाएंगे। पिछले कई सालों से कर्ज के बोझ तले दबे होने के कारण ये किसान बैंकिंग प्रणाली से बाहर हो गए थे, जिन्हें अब मुख्यधारा में वापस लाया जा सकेगा।

हमारा लक्ष्य स्पष्ट है- प्रक्रिया की जटिलताओं के कारण किसी भी अन्नदाता का नुकसान नहीं होना चाहिए। 5,975 करोड़ का यह प्रावधान उन 6.56 लाख परिवारों के लिए नई उम्मीद लेकर आएगा।

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