महाराष्ट्र की सड़कों पर आगामी 5 मार्च को बड़ा संकट खड़ा होने वाला है। राज्य की जीवनरेखा माने जाने वाले ट्रांसपोर्ट सेक्टर ने सरकार की नीतियों और ‘अन्यायपूर्ण’ ई-चालान प्रणाली के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। महाराष्ट्र ट्रांसपोर्टर्स एक्शन कमेटी के नेतृत्व में होने वाले इस विरोध प्रदर्शन में दावा किया गया है कि लगभग 1 लाख वाहन मुंबई के ऐतिहासिक आजाद मैदान में जुटेंगे।
क्यों उबला है ट्रांसपोर्टरों का गुस्सा?
ट्रांसपोर्टरों की नाराजगी का मुख्य केंद्र सरकार की ई-चालान प्रणाली और आठ महीने पहले किए गए वे वादे हैं, जिन्हें अब तक पूरा नहीं किया गया है।
ई-चालान की मार: संगठनों का आरोप है कि बिना किसी पुख्ता सबूत या रियल-टाइम अलर्ट (SMS) के उन पर भारी जुर्माना थोपा जा रहा है। कई मामलों में वाहन चालकों को चालान। अधूरे वादे: ट्रांसपोर्टरों के अनुसार, सरकार ने 8 महीने पहले मांगों को मानने का आश्वासन दिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं बदला।
प्रशासनिक रवैया: मुंबई बस ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हर्ष कोटक ने चेतावनी दी है कि यदि 5 मार्च को प्रशासन ने वाहनों को शहर की सीमा पर रोका, तो चालक वहीं सड़क जाम कर आंदोलन शुरू कर देंगे।
रणनीति: एपीएमसी में हुआ मंथन
गुरुवार को नवी मुंबई के एपीएमसी माथाडी भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें राज्यभर के परिवहन संगठनों के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस आंदोलन को अखिल भारतीय मोटर परिवहन कांग्रेस (AIMTC) ने भी अपना पूर्ण समर्थन दिया है, जिससे यह केवल स्थानीय नहीं बल्कि एक व्यापक विरोध का रूप ले चुका है।
आंदोलन का व्यापक असर: क्या-क्या रहेगा बंद?
इस हड़ताल की मार आम जनता से लेकर उद्योग जगत तक पड़ने वाली है। आंदोलन में निम्नलिखित वाहन शामिल होंगे:
भारी ट्रक और टेम्पो: जिससे आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
निजी बसें (Intercity): यात्रियों को आवाजाही में भारी परेशानी होगी।
स्कूल बसें: अभिभावकों और छात्रों के लिए 5 मार्च का दिन चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
आर्थिक सुनामी: ₹1,500 करोड़ का रोजाना नुकसान
विशेषज्ञों और ट्रांसपोर्ट संगठनों का अनुमान है कि यदि चक्का जाम सफल रहता है, तो राज्य को प्रतिदिन लगभग 1,500 करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान होगा। इसमें माल ढुलाई ठप होना, खराब होने वाली वस्तुओं (फल-सब्जी) का नुकसान और लॉजिस्टिक्स चेन का टूटना शामिल है।
मुख्य मांगें एक नजर में:
दोषपूर्ण ई-चालान प्रणाली में तत्काल सुधार और पुराने ‘अन्यायपूर्ण’ जुर्मानो की समीक्षा।
8 महीने पहले सरकार द्वारा किए गए लिखित समझौतों को लागू करना।
परिवहन क्षेत्र को प्रशासनिक उत्पीड़न से मुक्ति दिलाना।
हम बातचीत के लिए तैयार थे, लेकिन सरकार ने हमारे सब्र का इम्तिहान लिया है। अब फैसला आजाद मैदान की सड़कों पर होगा।”































