सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम्स और डिजिटल विज्ञापनों के मकड़जाल में उलझते बचपन को बचाने के लिए महाराष्ट्र सरकार अब एक ‘ठोस नीति’ तैयार कर रही है। मंगलवार को विधानसभा में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्री आशिष शेलार ने घोषणा की कि राज्य सरकार नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर नियंत्रण लगाने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स (Task Force) की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही बच्चों के डिजिटल व्यवहार को विनियमित करने वाला कानून बनाया जाएगा।
विधानसभा में गूंजी ‘डिजिटल लत’ की चिंता
भाजपा विधायक राजेश पवार द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान यह मुद्दा गरमाया। सदन में इस बात पर चिंता जताई गई कि किस तरह सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक विकास और पढ़ाई पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं।
टास्क फोर्स: 2 फरवरी 2026 से मिशन पर
मंत्री आशिष शेलार ने बताया कि सरकार ने इस विषय की गंभीरता को देखते हुए 2 फरवरी 2026 को एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया था। यह टास्क फोर्स निम्नलिखित बिंदुओं पर विस्तृत अध्ययन कर रही है:
* मानसिक और शारीरिक प्रभाव: सोशल मीडिया की लत से बच्चों में बढ़ता तनाव, अवसाद और शारीरिक निष्क्रियता।
* शैक्षणिक गिरावट: मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से छात्रों के प्रदर्शन पर पड़ने वाला असर।
* डिजिटल विज्ञापन: बच्चों को लक्षित (Targeted) करने वाले विज्ञापनों का उनके मनोविज्ञान पर प्रभाव।
देश का पहला ‘प्रभावी कानून’ बनाने का लक्ष्य
मंत्री शेलार ने स्पष्ट किया कि यद्यपि अन्य राज्यों ने इस दिशा में केवल घोषणाएं की हैं, लेकिन महाराष्ट्र एक ऐसा कानून लाना चाहता है जो वास्तव में लागू किया जा सके और प्रभावी हो।
हम केवल घोषणा नहीं करना चाहते। टास्क फोर्स की रिपोर्ट हमें वह वैज्ञानिक आधार प्रदान करेगी, जिससे हम नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल की उम्र और समय सीमा पर कानूनी नियंत्रण लगा सकेंगे।” — आशिष शेलार, IT मंत्री
चुनौतियां और समाधान की राह
* उम्र का सत्यापन (Age Verification): सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उम्र छिपाकर अकाउंट बनाने वालों पर नकेल कसना।
* अभिभावकों की भूमिका: कानून के साथ-साथ माता-पिता को भी डिजिटल पैरेंटिंग के प्रति जागरूक करना।
* गेमिंग रेगुलेशन: ऑनलाइन गेम्स में होने वाले वित्तीय लेन-देन और हिंसात्मक कंटेंट पर रोक।
सुरक्षित डिजिटल बचपन की ओर
महाराष्ट्र सरकार का यह रुख संकेत देता है कि आने वाले समय में बच्चों के लिए स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का इस्तेमाल पहले जैसा ‘अनियंत्रित’ नहीं रहेगा। टास्क फोर्स की रिपोर्ट इस डिजिटल क्रांति में ‘फिल्टर’ का काम करेगी, जिससे बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो।
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