महाराष्ट्र सरकार ने डिजिटल युग में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य विधान परिषद में बुधवार को ‘भारतीय न्याय संहिता (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक 2026’ को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा पेश किया गया यह विधेयक अब कानून बनने की राह पर है, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर महिलाओं को निशाना बनाने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ एक मजबूत ढाल बनेगा।
डिजिटल दुर्व्यवहार पर नकेल: 3 साल की सख्त सजा
बदलते दौर में जिस तरह से सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग बढ़ा है, उसे देखते हुए यह संशोधन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
* अपराध का दायरा: अब यदि कोई व्यक्ति फोन, ईमेल, सोशल मीडिया (फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स आदि) या किसी भी अन्य इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किसी महिला का यौन उत्पीड़न करता है, तो उसे अपराधी माना जाएगा।
* कठोर दंड: इस नए कानून के तहत दोषियों को 3 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। यह कदम ऑनलाइन स्टॉकिंग, अश्लील संदेश भेजने और डिजिटल धमकी देने वालों के मन में डर पैदा करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
एसिड हमला पीड़िताओं की निजता का संरक्षण
इस विधेयक में महिलाओं के सम्मान और उनकी गोपनीयता को लेकर एक और संवेदनशील प्रावधान जोड़ा गया है।
* नाम उजागर करने पर रोक: अब एसिड (तेजाब) हमले की पीड़िताओं के नाम या उनकी पहचान को सार्वजनिक करना कानूनी रूप से प्रतिबंधित होगा।
* उद्देश्य: अक्सर पहचान उजागर होने के कारण पीड़िताओं को सामाजिक प्रताड़ना और मानसिक आघात से गुजरना पड़ता है। यह कानून उन्हें समाज में सम्मान के साथ जीने और कानूनी लड़ाई लड़ने में मदद करेगा।
विधान परिषद में गूंजी सुरक्षा की आवाज
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन में विधेयक पेश करते हुए कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के लिए एक सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। विधानसभा में पहले ही पारित हो चुके इस बिल को विधान परिषद में भी सभी दलों का समर्थन मिला, जो यह दर्शाता है कि महिला सुरक्षा के मुद्दे पर पूरा महाराष्ट्र एकमत है।
प्रमुख संशोधनों पर एक नजर
प्रावधान विवरण
ऑनलाइन उत्पीड़न ईमेल, सोशल मीडिया या डिजिटल मंच पर यौन प्रताड़ना अब दंडनीय अपराध।
सजा की अवधि दोषियों को अधिकतम 3 साल के कारावास का प्रावधान।
एसिड अटैक विक्टिम पीड़िताओं की पहचान गुप्त रखी जाएगी; नाम उजागर करना अपराध होगा।
दायरा भारतीय न्याय संहिता (BNS) में राज्य-स्तरीय विशिष्ट संशोधन।
डिजिटल युग की नई लक्ष्मण रेखा
महाराष्ट्र का यह संशोधन अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है। जहां तकनीक ने जीवन आसान बनाया है, वहीं महिलाओं के लिए साइबर स्पेस में खतरे भी बढ़े हैं। 3 साल की सजा का यह प्रावधान न केवल अपराधियों को रोकेगा, बल्कि पीड़ित महिलाओं को न्याय मांगने के लिए सशक्त भी करेगा।
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