जम्मू-कश्मीर की सियासत के दिग्गज और पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah बुधवार रात एक भीषण हमले का शिकार होने से बाल-बाल बच गए। श्रीनगर के होटल रॉयल पार्क के बाहर हुई इस फायरिंग की घटना ने घाटी की सुरक्षा व्यवस्था और वीवीआईपी (VVIP) सुरक्षा पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
1. हमले का घटनाक्रम: शादी समारोह में दहशत
फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) बुधवार रात एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए होटल रॉयल पार्क पहुंचे थे। उनके साथ जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी भी मौजूद थे। समारोह खत्म होने के बाद, जैसे ही दोनों नेता होटल के मुख्य द्वार से बाहर निकलकर अपनी गाड़ियों की ओर बढ़ रहे थे, वहां पहले से घात लगाकर बैठे हमलावर ने अचानक हमला बोल दिया।
2. सुरक्षाबलों की मुस्तैदी और गिरफ्तारी
हमले की फिराक में खड़ा आरोपी 70 वर्षीय कमल सिंह जम्वाल पुलिस की पैनी नजरों से बच नहीं सका।
दबोचा गया हमलावर: जैसे ही कमल सिंह ने फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) को निशाना बनाकर फायर करने की कोशिश की, वहां तैनात मुस्तैद सुरक्षाकर्मियों ने उसे दबोच लिया।
गोली चली, लेकिन निशाना चूका: धक्का-मुक्की और धर-पकड़ के दौरान आरोपी की पिस्टल से एक गोली चल गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि गोली किसी को लगी नहीं और फारूक अब्दुल्ला को सुरक्षित घेरे में लेकर तुरंत वहां से निकाल लिया गया।
3. आरोपी की पहचान और पुलिस जांच
पुलिस ने आरोपी कमल सिंह जम्वाल को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है।
उम्र और मकसद: 70 साल की उम्र में इस तरह के हमले को अंजाम देना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है या इसके पीछे कोई व्यक्तिगत रंजिश या वैचारिक कट्टरता थी।
हथियार का स्रोत: पुलिस यह भी पता लगा रही है कि एक बुजुर्ग व्यक्ति के पास अवैध हथियार कहां से आया और वह होटल के इतने करीब तक पहुंचने में कैसे कामयाब रहा।
4. राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना के बाद केंद्र शासित प्रदेश में सियासी पारा चढ़ गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने इसे राज्य की शांति भंग करने की कोशिश बताया है।
घटना का विश्लेषण: एक नजर में
फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) पर हुआ यह हमला यह याद दिलाता है कि जम्मू-कश्मीर में सार्वजनिक जीवन जीने वाले नेताओं के लिए खतरा अभी टला नहीं है। हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया, लेकिन इस घटना ने वीवीआईपी सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की आवश्यकता को फिर से उजागर कर दिया है।
ये भी पढ़ें: ईरान-अमेरिका जंग की तपिश मुंबई की रसोई तक: एलपीजी संकट से थमीं रफ्तारें, शादियाँ महंगी और होटल बंद































