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Mathura Holi 2026: आज बरसाना में लड्डूमार होली से शुरू हुआ रंगोत्सव, जानिए पूरी ब्रज होली की तारीखें और परंपराएं

Mathura Holi 2026
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Mathura Holi 2026: ब्रज क्षेत्र में रंगों का त्योहार आज से जोर-शोर से शुरू हो गया है। आज मंगलवार को बरसाना के श्रीजी मंदिर (राधा रानी मंदिर) में लड्डूमार होली खेली गई, जिससे ब्रज की प्रसिद्ध 40 दिनों की होली (रंगोत्सव) की शुरुआत हुई। ये उत्सव 24 फरवरी 2026 से शुरू होकर 12 मार्च 2026 तक चलेगा।

भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की लीलाओं से जुड़ी ये परंपराएं आज भी जीवंत हैं। ब्रज में होली सिर्फ रंगों तक सीमित नहीं, बल्कि लठमार, फूलों, लड्डुओं और लाठियों से खेली जाती है। हर साल लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से यहां पहुंचते हैं।

ब्रज होली 2026 की प्रमुख तारीखें और कार्यक्रम

इस साल चंद्र ग्रहण या पंचांग के कारण कुछ जगहों पर होलिका दहन और धुलंडी में अंतर है, लेकिन ब्रज में परंपरागत रूप से निम्नलिखित तिथियां मान्य हैं:

  • 24 फरवरी 2026 (मंगलवार): लड्डूमार होली – बरसाना के श्रीजी मंदिर में पुजारी भक्तों पर लड्डू बरसाते हैं। यह रंगोत्सव की शुरुआत का प्रतीक है।
  • 25 फरवरी 2026 (बुधवार): लठमार होली – बरसाना में मुख्य लठमार होली। महिलाएं (राधा रानी का प्रतिनिधित्व करती हुईं) पुरुषों (हुरियारे, कृष्ण का प्रतिनिधित्व) पर लाठियों से मारती हैं, जबकि पुरुष गुलाल फेंकते हैं।
  • 26 फरवरी 2026 (गुरुवार): लठमार होली – नंदगांव में।
  • 1 मार्च 2026 (रविवार): फूलों की होली – वृंदावन में।
  • 3 मार्च 2026 (मंगलवार): होलिका दहन – मथुरा, वृंदावन और पूरे ब्रज में। (भारत के अन्य हिस्सों में ये 2 मार्च को हो सकता है, लेकिन ब्रज में परंपरा के अनुसार 3 मार्च को।)
  • 4 मार्च 2026 (बुधवार): धुलंडी / रंगवाली होली – मुख्य रंगों की होली। मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर, वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में गुलाल, अबीर और रंगों का उत्सव।

ब्रज की अनोखी होली परंपराएं

  • लड्डूमार होली: बरसाना में शुरूआत लड्डुओं से होती है, जहां पुजारी भक्तों पर मीठे लड्डू बरसाते हैं।
  • लठमार होली: महिलाओं का पुरुषों पर लाठियों से प्रहार, कृष्ण-राधा की लीला का प्रतीक।
  • फूलों की होली: वृंदावन में रंगों की जगह फूलों से होली।
  • बांके बिहारी मंदिर: होली के दिन हवा में गुलाल उड़ता है, भजन-कीर्तन और रसिया गायन से माहौल भक्तिमय हो जाता है।
  • द्वारकाधीश मंदिर: टेसू के फूलों और गुलाल से होली।

ये उत्सव भगवान कृष्ण के बचपन की लीलाओं को जीवंत करता है। ब्रज में होली सिर्फ दो दिन की नहीं, बल्कि लंबा रंगोत्सव है, जो भक्ति, संस्कृति और आनंद का संगम है।

NOTE: तिथियां पंचांग और स्थानीय परंपराओं पर आधारित हैं। यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन या मंदिर कमेटी से नवीनतम जानकारी जरूर लें। भीड़ और सुरक्षा को ध्यान में रखें।

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