महाराष्ट्र की राजनीति और सहकारिता क्षेत्र के सबसे चर्चित मामलों में से एक, महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक (MSCB) घोटाला मामले में शुक्रवार को एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया। मुंबई की एक विशेष अदालत ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दाखिल ‘क्लोजर रिपोर्ट’ को स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही दिवंगत अजित पवार, उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार और 70 से अधिक अन्य आरोपियों को इस मामले में पूर्ण रूप से ‘क्लीन चिट’ मिल गई है।
अदालत का फैसला: “कोई आपराधिक कृत्य नहीं”
विशेष न्यायाधीश महेश जाधव ने ईओडब्ल्यू द्वारा पेश की गई ‘सी-समरी’ (C-Summary) क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी दी। सी-समरी तब दाखिल की जाती है जब मामला तथ्यात्मक गलती पर आधारित हो या जांच में किसी भी प्रकार का आपराधिक साक्ष्य न मिले। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किसी भी प्रकार का आपराधिक कृत्य सिद्ध नहीं होता है। बैंक के कामकाज और ऋण आवंटन की प्रक्रिया में कोई भी धोखाधड़ी या गबन का पुख्ता प्रमाण नहीं मिला है।
अन्ना हजारे और ईडी की याचिकाएं खारिज
इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और अन्य याचिकाकर्ताओं ने ईओडब्ल्यू की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ ‘विरोध याचिका’ (Protest Petition) दायर की थी। अदालत ने इन सभी याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि जांच एजेंसी की रिपोर्ट तार्किक है।
इसके अलावा, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए आवेदन दिया था, जिसे अदालत ने नामंजूर कर दिया। अदालत के इस फैसले से अब ईडी द्वारा की जा रही समानांतर जांच पर भी गहरा असर पड़ने की संभावना है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला साल 2019 में तब सुर्खियों में आया था जब बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश पर आर्थिक अपराध शाखा ने एफआईआर दर्ज की थी।
आरोप: आरोप लगाया गया था कि महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के निदेशकों और अधिकारियों ने चीनी मिलों और अन्य सहकारी इकाइयों को नियमों को ताक पर रखकर सस्ते दाम पर बेचा और ऋण वितरित किया।
नुकसान का दावा: शुरुआती शिकायतों में करीब 25,000 करोड़ रुपए के कथित नुकसान का दावा किया गया था।
जांच का सफर: ईओडब्ल्यू ने लंबी जांच के बाद निष्कर्ष निकाला कि प्रक्रियाओं में कमियां हो सकती हैं, लेकिन इसमें कोई आपराधिक साजिश या वित्तीय गबन नहीं हुआ है।
राजनीतिक प्रभाव
2026 के राजनीतिक परिदृश्य में यह फैसला अजित पवार और उनकी पार्टी के लिए एक बड़ी संजीवनी के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कई वर्षों से विपक्ष इस घोटाले को लेकर सरकार और विशेषकर पवार परिवार पर हमलावर रहा है। अदालत के इस फैसले से अब उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का कानूनी पटाक्षेप हो गया है।
कुल आरोपी: 70 से अधिक (अजित पवार और सुनेत्रा पवार समेत)।
रिपोर्ट का प्रकार: सी-समरी (क्लोजर रिपोर्ट)।
निर्णय: सभी आरोपों से बरी।
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