Mumbai Crime: अंडरवर्ल्ड और ड्रग्स की दुनिया का बड़ा नाम रहे इकबाल मेमन उर्फ इकबाल मिर्ची के परिवार पर कानून का शिकंजा और कस गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुंबई की एक विशेष अदालत में अर्जी दाखिल कर मिर्ची और उसके परिजनों से जुड़ी 18 बेशकीमती संपत्तियों को कुर्क करने की अनुमति मांगी है। यह पूरी कार्रवाई भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) के तहत की जा रही है।
वर्ली के प्राइम लोकेशन पर ED की नजर
जब्त की जाने वाली संपत्तियों में सबसे महत्वपूर्ण मुंबई के वर्ली इलाके की तीन इमारतें हैं। समुद्र के किनारे स्थित इन संपत्तियों की बाजार में कीमत करोड़ों में है:
- सी व्यू (Sea View)
- मारियम लॉज (Mariam Lodge)
- राबिया मेंशन (Rabia Mansion)
अकेले इन तीन संपत्तियों की अनुमानित कीमत 497 करोड़ रुपए आंकी गई है। ईडी का आरोप है कि इन संपत्तियों को अवैध तरीके से हथियाया गया और इनके जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की गई।
दुबई में फैला ‘मिर्ची’ का विदेशी जाल
इकबाल मिर्ची ने न केवल भारत बल्कि विदेशों में भी अवैध संपत्तियों का विशाल नेटवर्क खड़ा किया था। ED ने अपनी अर्जी में दुबई स्थित 15 संपत्तियों को भी शामिल किया है।
- ये संपत्तियां मिर्ची के परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज हैं।
- जांच एजेंसी का मानना है कि ड्रग तस्करी और फिरौती से कमाए गए पैसों को इन विदेशी संपत्तियों में निवेश किया गया था।
क्या है भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA)?
ED इस मामले में FEOA कानून का सहारा ले रही है। यह कानून सरकार को उन अपराधियों की संपत्तियां जब्त करने का अधिकार देता है जो:
- 100 करोड़ रुपए से अधिक के आर्थिक अपराध में शामिल हों।
- गिरफ्तारी से बचने के लिए देश छोड़कर भाग गए हों और वापस आने से इनकार कर रहे हों।
यद्यपि इकबाल मिर्ची की विदेश में मौत हो चुकी है, लेकिन उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ जांच जारी है। इस कानून के तहत संपत्ति जब्त होने का मतलब है कि अब इन इमारतों का मालिकाना हक सीधे भारत सरकार के पास चला जाएगा।
अंडरवर्ल्ड की कमर तोड़ने की तैयारी
इकबाल मिर्ची कभी दाऊद इब्राहिम का बेहद करीबी और उसके सिंडिकेट का ‘लॉजिस्टिक्स हेड’ माना जाता था। उसकी मौत के सालों बाद भी उसकी संपत्तियों पर हो रही यह कार्रवाई एक कड़ा संदेश है कि ‘क्राइम की कमाई’ कभी न कभी कानून की जद में आती ही है। यदि अदालत ED की अर्जी स्वीकार कर लेती है, तो यह मुंबई अंडरवर्ल्ड के वित्तीय ढांचे पर अब तक की सबसे बड़ी चोट होगी































