महाराष्ट्र

नासिक का फर्जी बाबा कांड: ‘चमत्कार’ के नाम पर करता था कुंवारी लड़कियों का शोषण

नासिक
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महाराष्ट्र के नासिक से सामने आया अशोक खरात का मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि अंधविश्वास, तकनीक के दुरुपयोग और लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ की चौंकाने वाली कहानी बन चुका है। खुद को ‘गॉडमैन’ बताने वाला Ashok Kharat लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए बेहद चालाक और योजनाबद्ध तरीके अपनाता था।

‘कमरे में आत्मा’ और ‘दैवीय आवाज’ का डर

जांच में सामने आया है कि अशोक खरात अपने शिकार को ये विश्वास दिलाता था कि उसके पास किसी ‘दैवीय शक्ति’ से बात करने की क्षमता है। वो लोगों को एक कमरे में ले जाकर कहता था कि वहां आत्मा मौजूद है, जो उनसे संवाद कर सकती है।

पीड़ितों को डर और आस्था के बीच उलझाकर वो उन्हें मानसिक रूप से कमजोर कर देता था, जिससे वे उसकी बातों पर आसानी से विश्वास करने लगते थे।

तकनीक का इस्तेमाल कर रचा धोखे का जाल

सबसे चौंकाने वाला खुलासा ये है कि खरात ‘दैवीय आवाज’ पैदा करने के लिए तकनीक का सहारा लेता था। बताया जा रहा है कि वो मोबाइल में एक खास तरह के ऐप का उपयोग करता था, जो वॉइस असिस्टेंट (जैसे Siri) की तरह काम करता था।

इस तकनीक के जरिए वो ऐसी आवाजें उत्पन्न करता था, जिससे पीड़ितों को लगता था कि सच में कोई अदृश्य शक्ति उनसे बात कर रही है। इसी भ्रम का फायदा उठाकर वो लोगों को अपने नियंत्रण में ले लेता था।

कुंवारी लड़कियों को बनाता था निशाना

जांच एजेंसियों के अनुसार, अशोक खरात खासतौर पर कुंवारी लड़कियों को अपने जाल में फंसाता था। वो उन्हें ‘शुद्धिकरण’, ‘आशीर्वाद’ या ‘समस्या समाधान’ के नाम पर बुलाता था और फिर अंधविश्वास का फायदा उठाकर उनका शोषण करता था।

उसकी चाल इतनी शातिर थी कि पीड़ित लंबे समय तक सच समझ ही नहीं पाते थे और डर या सामाजिक बदनामी के कारण चुप रहते थे।

डर, आस्था और दबाव का खतरनाक मिश्रण

खरात अपने पीड़ितों को ये भी विश्वास दिलाता था कि अगर उन्होंने उसकी बात नहीं मानी, तो उनके साथ या उनके परिवार के साथ कुछ बुरा हो सकता है। इस तरह वो डर और आस्था का ऐसा जाल बुनता था, जिससे बाहर निकलना आसान नहीं होता था।

जांच में खुल रहे चौंकाने वाले राज

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले में नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस अब ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे और कितने लोग इसके शिकार बने।

अंधविश्वास के खिलाफ चेतावनी

ये मामला समाज के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है। ये दिखाता है कि कैसे कुछ लोग अंधविश्वास और तकनीक का इस्तेमाल कर भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बना लेते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों को जागरूक होने और किसी भी ‘चमत्कार’ या ‘दैवीय दावे’ पर आंख बंद करके विश्वास न करने की जरूरत है।

नासिक का ये मामला केवल एक व्यक्ति के अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि ये उस सोच को भी उजागर करता है, जहां अंधविश्वास और डर के कारण लोग आसानी से ठगे जाते हैं। ऐसे मामलों से सबक लेते हुए समाज को अधिक जागरूक और सतर्क बनने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह के जाल में न फंसे।

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