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सिक्किम में कुदरत का कहर: लाचेन-चुंगथांग मार्ग पर फंसे 800 पर्यटक, बर्फबारी और भूस्खलन के बीच सेना का ‘महा-रेस्क्यू’ मिशन शुरू

सिक्किम
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सिक्किम का सुरम्य मंगन जिला इस समय भारी बारिश और भीषण बर्फबारी की चपेट में है। प्रकृति के इस रौद्र रूप ने पर्यटकों के उत्साह को डर में बदल दिया है। लाचेन-चुंगथांग रोड पर ‘तरुम चू’ के समीप हुए बड़े भूस्खलन और सड़कों पर आई गहरी दरारों के कारण 800 से अधिक पर्यटक बीच रास्ते में फंस गए हैं। चारों ओर बिछी बर्फ की सफेद चादर और ऊपर से गिरते पत्थरों ने इस क्षेत्र को पूरी तरह से शेष दुनिया से काट दिया है।

1. ‘तरुम चू’ के पास कुदरती घेराबंदी: दरकती सड़कें और जोखिम
सिक्किम के ऊपरी इलाकों में पिछले 24 घंटों से जारी खराब मौसम ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।

* भूस्खलन का खतरा: भारी बारिश के कारण ‘तरुम चू’ के पास पहाड़ का एक हिस्सा सड़क पर आ गिरा है।
* सड़कों में दरारें: कड़ाके की ठंड और भूगर्भीय हलचल के चलते लाचेन की मुख्य सड़क पर लंबी दरारें पड़ गई हैं, जिससे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह असंभव हो गई है।
* प्रशासन की सख्त हिदायत: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों को “जहां हैं, वहीं रहने” (Stay-in-place) के निर्देश जारी किए हैं ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

2. सोमवार सुबह ‘मेगा ऑपरेशन’ की तैयारी
फंसे हुए पर्यटकों को निकालने के लिए प्रशासन ने एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। यह पूरा ऑपरेशन सोमवार सुबह शुरू होगा, लेकिन इसकी सफलता पूरी तरह मौसम की स्थिति और डोंगक्या ला एक्सिस से बर्फ हटने पर निर्भर करेगी।

* संयुक्त मोर्चा: इस बचाव कार्य में सिक्किम पुलिस, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), सीमा सड़क संगठन (BRO) और भारतीय सेना के जवान एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
* सेना की ढाल: भारतीय सेना के जवानों ने शून्य से नीचे के तापमान में भी मोर्चा संभाल लिया है। मशीनरी की मदद से सड़क बहाल करने और बर्फ हटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है।

3. पर्यटकों के लिए सुरक्षा कवच और आश्रय
लाचेन में मौजूद पर्यटकों के लिए स्थानीय प्रशासन और सेना ने विशेष इंतजाम किए हैं। अधिकारियों ने बताया कि जब तक रास्ता पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक किसी भी पर्यटक को जोखिम भरे मार्ग पर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पर्यटकों को सुरक्षित होटलों और होमस्टे में रहने की सलाह दी गई है, जहाँ भोजन और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

4. बीआरओ और सेना की अग्निपरीक्षा
पहाड़ों पर जमी बर्फ की मोटी परत और लगातार हो रही बारिश बीआरओ (BRO) के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। आधुनिक मशीनों के साथ सेना के इंजीनियर सड़कों को जोड़ने के प्रयास में जुटे हैं ताकि जल्द से जल्द फंसे हुए लोगों को चुंगथांग और फिर वहां से गंगटोक की ओर रवाना किया जा सके।

धैर्य और साहस का इम्तिहान
उत्तरी सिक्किम में फंसा हर पर्यटक इस समय मौसम के साफ होने की दुआ कर रहा है। प्रशासन और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी ने राहत की उम्मीद जगाई है, लेकिन हिमालय की चोटियों पर बदलता मौसम अब भी इस रेस्क्यू ऑपरेशन की राह में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। उम्मीद है कि सोमवार की सुबह पर्यटकों के लिए नई उम्मीद की किरण लेकर आएगी।
हेल्पलाइन नोट: पर्यटकों के परिजनों के लिए प्रशासन ने संपर्क सूत्र जारी किए हैं और किसी भी आपात स्थिति में निकटतम सेना कैंप या पुलिस पोस्ट से संपर्क करने को कहा गया है।

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