केरल विधानसभा चुनाव में तिरुवनंतपुरम की नेमोम (Nemom) सीट महज एक निर्वाचन क्षेत्र नहीं, बल्कि विचारधाराओं का सबसे बड़ा कुरुक्षेत्र बन चुकी है। यह सीट भाजपा के लिए ‘केरल का प्रवेश द्वार’ है, तो वामपंथियों के लिए अपनी साख बचाने की लड़ाई। इस बार यहाँ मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प है, जिसमें केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर, मौजूदा शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी और कांग्रेस के युवा चेहरे के. एस. सबरीनाथन के बीच कांटे की टक्कर है।
1. भाजपा का ‘प्रवेश द्वार’ और राजगोपाल की विरासत
नेमोम का इतिहास भाजपा के लिए गौरवशाली रहा है। साल 2016 में दिग्गज नेता ओ. राजगोपाल ने यहाँ कमल खिलाकर इतिहास रचा था, जिससे भाजपा का केरल विधानसभा में पहली बार खाता खुला।
* रणनीति: इस बार भाजपा ने अपने सबसे प्रभावी चेहरों में से एक, केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर को मैदान में उतारा है। पार्टी को उम्मीद है कि राजीव का ‘डेवलपमेंट मॉडल’ और शहरी मतदाताओं के बीच उनकी पैठ भाजपा को दोबारा जीत दिलाएगी।
* संगठनात्मक शक्ति: शहरी क्षेत्रों में भाजपा का कैडर बेहद मजबूत है, जो घर-घर जाकर केंद्र सरकार की योजनाओं का प्रचार कर रहा है।
2. वी. शिवनकुट्टी: ‘लाल किले’ को बचाने की चुनौती
मौजूदा विधायक और राज्य के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी (CPI-M) के लिए यह प्रतिष्ठा की लड़ाई है। 2021 में उन्होंने इस सीट को भाजपा से वापस छीना था।
* विकास का कार्ड: शिवनकुट्टी अपने कार्यकाल के दौरान शिक्षा और बुनियादी ढांचे में किए गए कार्यों के दम पर वोट मांग रहे हैं।
* कैडर आधारित वोट: एलडीएफ (LDF) का मजबूत संगठनात्मक ढांचा और ग्रामीण इलाकों में उनकी पकड़ शिवनकुट्टी की सबसे बड़ी ताकत है। वे इस सीट को फिर से वामपंथी विचारधारा का अभेद्य दुर्ग बनाने की कोशिश में हैं।
3. कांग्रेस की वापसी की कोशिश: के. एस. सबरीनाथन का दांव
यूडीएफ (UDF) ने इस त्रिकोणीय मुकाबले को और भी कड़ा बनाने के लिए के. एस. सबरीनाथन को उतारा है।
* युवा चेहरा: सबरीनाथन की छवि एक पढ़े-लिखे और सक्रिय युवा नेता की है। कांग्रेस यहाँ उन मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है जो एलडीएफ और भाजपा दोनों से असंतुष्ट हैं।
* धर्मनिरपेक्ष वोट: कांग्रेस का मुख्य ध्यान मुस्लिम, ईसाई और उन धर्मनिरपेक्ष हिंदू वोटों पर है, जो भाजपा के वैचारिक आधार के खिलाफ हैं।
4. वैचारिक जड़ें: हिंदू मुन्नानी से भाजपा तक
नेमोम की राजनीति सिर्फ हार-जीत की कहानी नहीं, बल्कि दशकों के सामाजिक और वैचारिक बदलाव का परिणाम है।
* ऐतिहासिक आधार: 1980 के दशक में ‘हिंदू मुन्नानी’ आंदोलन के जरिए यहाँ एक वैचारिक जमीन तैयार हुई थी।
* वोट बैंक का निर्माण: भाजपा ने इसी आधार को एक संगठित वोट बैंक में बदला। आज नेमोम में भाजपा का एक निश्चित और वफादार मतदाता वर्ग है, जो हर चुनाव में पार्टी को मजबूती प्रदान करता है। इसी कारण यहाँ की लड़ाई ‘कम्युनिज्म बनाम राष्ट्रवाद’ के धरातल पर लड़ी जाती है।
परिणाम तय करेंगे केरल का भविष्य
नेमोम का चुनाव यह तय करेगा कि केरल की राजनीति में भाजपा की ‘तीसरी शक्ति’ कितनी स्थायी है। क्या राजीव चंद्रशेखर का आधुनिक नेतृत्व भाजपा की वापसी कराएगा, या वामपंथी कैडर और कांग्रेस की सेंधमारी समीकरण बदल देगी? नेमोम का नतीजा पूरे केरल को एक बड़ा राजनीतिक संदेश देगा।
नेमोम केवल एक सीट नहीं, बल्कि केरल की राजनीति का वह पैमाना है जो बताता है कि राज्य की हवा किस दिशा में बह रही है।”































