Nitish Kumar in Rajya Sabha: बिहार की सियासत में गुरुवार को एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया। पिछले 20 वर्षों से राज्य की राजनीति की धुरी रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सक्रिय मुख्यमंत्री पद की राजनीति से विदा लेने का मन बना लिया है। 1 मार्च को अपना 75वां जन्मदिन मनाने वाले नीतीश कुमार ने अपनी उम्र और सेहत को प्राथमिकता देते हुए राज्यसभा जाने का निर्णय लिया है। उन्होंने गुरुवार को इसके लिए विधिवत नामांकन भी दाखिल कर दिया।
पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, तथा उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए पूर्व में…
— Nitish Kumar (@NitishKumar) March 5, 2026
चारों सदनों के सदस्य बनने की व्यक्तिगत इच्छा
नीतीश कुमार ने इस बड़े फैसले के बाद सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपनी एक पुरानी इच्छा का जिक्र किया। उन्होंने लिखा, “मेरी हमेशा से यह इच्छा थी कि मैं विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) और संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) का सदस्य बनूं। इसी क्रम में अब मैं राज्यसभा सदस्य बनना चाहता हूं। नई सरकार को मेरा पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा।”
आज माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी के साथ पटना में शिष्टाचार मुलाकात की। pic.twitter.com/TX1otMm9N1
— Nitish Kumar (@NitishKumar) March 5, 2026
बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री?
नीतीश कुमार के इस कदम के साथ ही बिहार में सत्ता के नए समीकरणों पर मुहर लग गई है। करीब दो दशक तक ‘बड़े भाई’ की भूमिका निभाने वाले जदयू के पीछे हटने के बाद, अब राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मुख्यमंत्री बनने की प्रबल संभावना है।
राज्य सभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। pic.twitter.com/R9mDOHUfYr
— Nitish Kumar (@NitishKumar) March 5, 2026
मुख्यमंत्री की रेस में ये नाम सबसे आगे:
- नित्यानंद राय: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और पार्टी का बड़ा चेहरा।
- सम्राट चौधरी: वर्तमान डिप्टी सीएम और प्रदेश की राजनीति में आक्रामक पकड़।
- दिलीप जायसवाल व संजीव चौरसिया: संगठन के मजबूत स्तंभ।
- पार्टी किसी चौंकाने वाले ‘नए चेहरे’ पर भी दांव खेल सकती है।
जदयू में नई भूमिका और उत्तराधिकार
नीतीश कुमार के जाने के बाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) की भूमिका भी बदलने वाली है। चर्चा है कि सरकार में संतुलन बनाए रखने के लिए जदयू की ओर से विजय चौधरी या नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। हालांकि, पार्टी के भीतर एक वर्ग किसी दलित चेहरे को आगे बढ़ाने की वकालत भी कर रहा है ताकि सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला बरकरार रहे।
नीतीश का सफर: समझौतों और सिद्धांतों की राजनीति
2005 से शुरू हुआ नीतीश कुमार का सफर कई उतार-चढ़ाव का गवाह रहा। गठबंधन बदले, साथी बदले, लेकिन बिहार की कुर्सी पर ‘नीतीश’ नाम का ही सिक्का चलता रहा। उन्होंने बिहार को ‘जंगलराज’ की छवि से बाहर निकालकर ‘विकास’ की पटरी पर लाने का श्रेय हासिल किया। अब उनके राज्यसभा जाने से बिहार में एक शून्य पैदा होगा, जिसे भरने की चुनौती भाजपा और जदयू की नई टीम के सामने होगी।
आगे क्या?
नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नीतीश कुमार आधिकारिक तौर पर दिल्ली की राजनीति में अपनी भूमिका निभाएंगे। बिहार में नई सरकार का स्वरूप क्या होगा और भाजपा किसे कमान सौंपेगी, इसका फैसला अगले कुछ दिनों में दिल्ली दरबार में होने वाली बैठकों में हो जाएगा।




























