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Nitish Kumar in Rajya Sabha: बिहार में ‘नीतीश युग’ का समापन, पहली बार BJP के CM की सुगबुगाहट

Nitish Kumar in Rajya Sabha
Nitish Kumar in Rajya Sabha

Nitish Kumar in Rajya Sabha: बिहार की सियासत में गुरुवार को एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया। पिछले 20 वर्षों से राज्य की राजनीति की धुरी रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सक्रिय मुख्यमंत्री पद की राजनीति से विदा लेने का मन बना लिया है। 1 मार्च को अपना 75वां जन्मदिन मनाने वाले नीतीश कुमार ने अपनी उम्र और सेहत को प्राथमिकता देते हुए राज्यसभा जाने का निर्णय लिया है। उन्होंने गुरुवार को इसके लिए विधिवत नामांकन भी दाखिल कर दिया।

चारों सदनों के सदस्य बनने की व्यक्तिगत इच्छा
नीतीश कुमार ने इस बड़े फैसले के बाद सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपनी एक पुरानी इच्छा का जिक्र किया। उन्होंने लिखा, “मेरी हमेशा से यह इच्छा थी कि मैं विधानमंडल के दोनों सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) और संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) का सदस्य बनूं। इसी क्रम में अब मैं राज्यसभा सदस्य बनना चाहता हूं। नई सरकार को मेरा पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा।”

बिहार में पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री?
नीतीश कुमार के इस कदम के साथ ही बिहार में सत्ता के नए समीकरणों पर मुहर लग गई है। करीब दो दशक तक ‘बड़े भाई’ की भूमिका निभाने वाले जदयू के पीछे हटने के बाद, अब राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मुख्यमंत्री बनने की प्रबल संभावना है।

मुख्यमंत्री की रेस में ये नाम सबसे आगे:
  • नित्यानंद राय: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और पार्टी का बड़ा चेहरा।
  • सम्राट चौधरी: वर्तमान डिप्टी सीएम और प्रदेश की राजनीति में आक्रामक पकड़।
  • दिलीप जायसवाल व संजीव चौरसिया: संगठन के मजबूत स्तंभ।
  • पार्टी किसी चौंकाने वाले ‘नए चेहरे’ पर भी दांव खेल सकती है।

जदयू में नई भूमिका और उत्तराधिकार
नीतीश कुमार के जाने के बाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) की भूमिका भी बदलने वाली है। चर्चा है कि सरकार में संतुलन बनाए रखने के लिए जदयू की ओर से विजय चौधरी या नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। हालांकि, पार्टी के भीतर एक वर्ग किसी दलित चेहरे को आगे बढ़ाने की वकालत भी कर रहा है ताकि सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला बरकरार रहे।

नीतीश का सफर: समझौतों और सिद्धांतों की राजनीति
2005 से शुरू हुआ नीतीश कुमार का सफर कई उतार-चढ़ाव का गवाह रहा। गठबंधन बदले, साथी बदले, लेकिन बिहार की कुर्सी पर ‘नीतीश’ नाम का ही सिक्का चलता रहा। उन्होंने बिहार को ‘जंगलराज’ की छवि से बाहर निकालकर ‘विकास’ की पटरी पर लाने का श्रेय हासिल किया। अब उनके राज्यसभा जाने से बिहार में एक शून्य पैदा होगा, जिसे भरने की चुनौती भाजपा और जदयू की नई टीम के सामने होगी।

आगे क्या?
नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नीतीश कुमार आधिकारिक तौर पर दिल्ली की राजनीति में अपनी भूमिका निभाएंगे। बिहार में नई सरकार का स्वरूप क्या होगा और भाजपा किसे कमान सौंपेगी, इसका फैसला अगले कुछ दिनों में दिल्ली दरबार में होने वाली बैठकों में हो जाएगा।

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