Farmers Loan Waiver: महाराष्ट्र में चुनावी मौसम के दौरान बड़े-बड़े वादों की बौछार होती है, लेकिन अब जब सरकार बन चुकी है, तो हकीकत सामने आने लगी है। राज्य के उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री अजित पवार ने किसानों के सामने अपनी बात बिल्कुल साफ कर दी है। उन्होंने कहा कि किसानों की कर्जमाफी का कोई वादा नहीं किया गया था, और अब राज्य की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि इसे लागू किया जा सके। यह बात उन्होंने पुणे जिले के दौंड में एक कार्यक्रम के दौरान कही, जहां उन्होंने किसानों से 31 मार्च तक अपने फसल लोन की राशि बैंकों में जमा करने को कहा।
अजित पवार का यह बयान उस वक्त आया, जब महायुति सरकार पर किसानों को राहत देने का दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा कि पैसों के मामले में कोई ढोंग नहीं चल सकता। उनके शब्दों में, “मैंने विधानसभा में भी कहा था कि कई चीजों पर बातें बनाई जा सकती हैं, लेकिन जब बात वित्त की आती है, तो वहां सच्चाई ही सामने रहती है।” यह सुनकर नई पीढ़ी के लोग, जो सोशल मीडिया पर हर मुद्दे को ट्रेंड बनाते हैं, सोच में पड़ गए कि क्या वाकई किसानों के लिए राहत की कोई उम्मीद नहीं बची?
पहले क्या हुआ था?
अजित पवार ने यह भी बताया कि वे 11 बार बजट पेश कर चुके हैं और इस दौरान किसानों के लिए कई कदम उठाए गए हैं। बिजली बिलों में छूट, फसलों के कर्ज पर राहत, और दूध के लिए अनुदान जैसी योजनाएं उनके कार्यकाल में लागू हुईं। लेकिन इस बार हालात अलग हैं। उन्होंने मालेगांव में एक कार्यक्रम में कहा कि लाडली बहना योजना की वजह से सरकार पर 40 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ गया है। ऐसे में अब हर किसी को राज्य की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में योगदान देना होगा। यह बात न सिर्फ किसानों के लिए, बल्कि हर उस युवा के लिए भी अहम है, जो सरकार से बड़ी उम्मीदें रखता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि किसानों की कर्जमाफी (Farmers’ Loan Waiver) इस बार संभव नहीं है। साथ ही, उन्होंने युवाओं और किसानों से अपील की कि वे 31 मार्च तक लोन चुकाएं (Repay Loan by March 31) ताकि बैंकिंग सिस्टम में कोई दिक्कत न आए। यह सुनकर शायद कुछ लोगों को निराशा हुई होगी, लेकिन अजित पवार ने अपनी बात को तर्क के साथ रखा। उनका कहना था कि जब राज्य की माली हालत ही ठीक नहीं होगी, तो बड़े-बड़े वादे कैसे पूरे किए जा सकते हैं?
केंद्र से रिश्तों का जिक्र
अजित पवार ने अपनी बात को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार से अपने करीबी रिश्तों का भी हवाला दिया। मालेगांव शुगर फैक्ट्री के चुनावों के दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह उनके करीबी हैं। उनका यह कहना था कि अगर केंद्र या राज्य में कोई काम करना होगा, तो वह उनके जरिए ही होगा। उन्होंने एक उदाहरण भी दिया कि अमित शाह की वजह से फैक्ट्री का आयकर माफ हुआ, जो पहले कभी नहीं हुआ था। यह बात कहकर उन्होंने अपने चाचा शरद पवार पर भी परोक्ष रूप से निशाना साधा।
यह बयान नई पीढ़ी के लिए इसलिए भी दिलचस्प है, क्योंकि आज के युवा राजनीति में पारदर्शिता और ठोस कदमों की उम्मीद करते हैं। अजित पवार का यह दावा कि वे केंद्र से सीधे मदद ला सकते हैं, शायद कुछ लोगों को भरोसा दे सकता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह भरोसा किसानों के लिए कर्जमाफी तक पहुंचेगा?
विपक्ष का जवाब
अजित पवार के इस बयान पर विपक्ष भी चुप नहीं रहा। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता अतुल लोंढे ने कहा कि किसानों की कर्जमाफी का वादा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया था। उनका कहना था कि जब वादा किया गया है, तो उसे हर हाल में पूरा करना होगा। यह बात महाराष्ट्र की सियासत में एक नया मोड़ ला सकती है, क्योंकि किसान इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं।
लेकिन अजित पवार ने अपनी बात पर अडिग रहते हुए कहा कि उन्होंने कभी ऐसा कोई वादा नहीं किया। उनके मुताबिक, यह सिर्फ सियासी बयानबाजी हो सकती है, लेकिन वित्त मंत्री होने के नाते वे सिर्फ वही कह सकते हैं, जो राज्य की आर्थिक स्थिति के हिसाब से मुमकिन हो। यह सुनकर शायद कुछ युवाओं को लगे कि राजनीति में वादे और हकीकत के बीच कितना बड़ा फासला होता है।
किसानों के सामने चुनौती
अजित पवार का यह बयान किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती लेकर आया है। 31 मार्च तक लोन चुकाने की समय सीमा उनके सामने है, और कर्जमाफी की उम्मीद टूटने से कई सवाल उठ रहे हैं। खेती पहले से ही महंगी हो चुकी है, और ऊपर से प्राकृतिक आपदाएं जैसे सूखा या बाढ़ किसानों की कमर तोड़ देती हैं। ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि क्या सरकार के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है?
अजित पवार ने यह भी कहा कि राज्य को आर्थिक रूप से मजबूत करना अब सबकी जिम्मेदारी है। यह बात सुनने में अच्छी लगती है, लेकिन किसानों के लिए यह कितना व्यावहारिक है, यह वक्त ही बताएगा। खासकर नई पीढ़ी, जो खेती को नए तरीकों से देख रही है, उनके लिए यह एक ऐसा मुद्दा है, जो उनकी सोच को प्रभावित कर सकता है।
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