मुंबई में झोपड़पट्टियों की समस्या को खत्म करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की है। उपमुख्यमंत्री Eknath Shinde ने ‘हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे शहरी जनकल्याण अभियान’ की घोषणा करते हुए शहर के सुनियोजित विकास का रोडमैप पेश किया है। ये पहल Balasaheb Thackeray की जन्मशताब्दी के अवसर पर शुरू की जा रही है, जिसे उनके सपनों के शहर के निर्माण से जोड़कर देखा जा रहा है।
झोपड़पट्टी पुनर्विकास को मिलेगा नया रूप
इस अभियान के तहत बड़े पैमाने पर झोपड़पट्टियों का समूह पुनर्विकास किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कम से कम 50 एकड़ क्षेत्रफल और 51% से अधिक झोपड़पट्टी वाले इलाकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन क्षेत्रों में सरकारी, निजी और अर्ध-सरकारी जमीनों पर बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट विकसित किए जाएंगे।
इसके लिए पहले विस्तृत सर्वे, सटीक मापन और बायोमेट्रिक डेटा संग्रह किया जाएगा, जिससे प्रत्येक परिवार की जानकारी सुरक्षित रूप से दर्ज हो सके। इसके बाद स्थानीय निकायों और संबंधित एजेंसियों के सहयोग से परियोजनाओं को गति दी जाएगी।
अब मिलेंगे बड़े और बेहतर घर
झोपड़पट्टियों में रहने वाले लोगों के लिए ये योजना राहत लेकर आई है। पहले जहां 180 से 269 वर्गफुट तक के घर मिलते थे, अब सरकार ने 300 वर्गफुट के पक्के मकान देने का निर्णय लिया है। इससे लोगों को अधिक जगह, बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित आवास मिलेगा। साथ ही पुराने प्रोजेक्ट्स को भी नए मानकों के अनुसार अपग्रेड किया जाएगा।
‘नेत्रम’ तकनीक से होगी सख्त निगरानी
नई झोपड़पट्टियों के निर्माण को रोकने के लिए सरकार आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रही है। ‘नेत्रम’ सिस्टम के तहत सैटेलाइट इमेज, जीआईएस मैपिंग और डिजिटल डेटा के माध्यम से पूरे शहर की निगरानी की जाएगी।
हर चार महीने में उपग्रह चित्रों के जरिए ये जांच होगी कि कहीं नए अवैध निर्माण तो नहीं हो रहे। यदि किसी क्षेत्र में नई झोपड़ियां बनती पाई गईं, तो संबंधित विभागों को तुरंत सूचना देकर कार्रवाई की जाएगी।
मेंटेनेंस शुल्क में प्रस्तावित बदलाव
नई योजना के तहत ऊंची इमारतों का निर्माण होगा, जिससे मेंटेनेंस लागत भी बढ़ेगी। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने शुल्क संरचना में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। विभिन्न ऊंचाई की इमारतों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए जा सकते हैं, और इसके लिए नियमों में संशोधन की प्रक्रिया जारी है।
आम लोगों को मिलेगा बड़ा लाभ
सरकार का मानना है कि इस अभियान से लाखों लोगों को सुरक्षित और स्थायी आवास मिलेगा। साथ ही शहर में अवैध बस्तियों के विस्तार पर रोक लगेगी, जिससे शहरी ढांचे में सुधार आएगा।
यदि ये योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में मुंबई का स्वरूप बदल सकता है और झोपड़पट्टी-मुक्त शहर का लक्ष्य वास्तविकता में बदल सकता है।
ये भी पढ़ें: मुंबई में 6 दिन टिफिन बंद: गांव लौटे डब्बेवाले, जानें आखिर क्यों?




























