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उत्तर प्रदेश: MBBS में दाखिले की सनक: दिव्यांग कोटे के लिए युवक ने ने काट लिया खुद का पंजा

उत्तर प्रदेश
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जौनपुर (उत्तर प्रदेश)। शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में कोटे के दुरुपयोग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला जौनपुर जिले से सामने आया है। यहां एक युवक ने दिव्यांग कोटे के तहत MBBS में प्रवेश पाने के उद्देश्य से अपने बाएं पैर का पंजा काट लिया, लेकिन बाद में उसकी प्रेमिका द्वारा की गई शिकायत से पूरा मामला उजागर हो गया।

इस घटना ने न सिर्फ मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि ये भी दिखाया है कि किस हद तक कुछ लोग गलत रास्ता अपनाने को तैयार हो जाते हैं।

कौन है युवक और क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार युवक की पहचान सूरज के रूप में हुई है, जो जौनपुर जिले का निवासी बताया जा रहा है। वो मेडिकल की पढ़ाई करना चाहता था और इसके लिए उसने दिव्यांग कोटे का लाभ लेने की योजना बनाई। इसी उद्देश्य से उसने खुद को स्थायी दिव्यांग साबित करने की कोशिश की।

घटना के बाद युवक ने खुद को दुर्घटना का शिकार बताया, लेकिन जांच के दौरान सामने आया कि ये चोट जानबूझकर और योजनाबद्ध तरीके से लगाई गई थी।

प्रेमिका के बयान से खुली साजिश

मामला तब सामने आया जब युवक की प्रेमिका ने अधिकारियों को जानकारी दी कि ये कोई हादसा नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया कृत्य है। उसने बताया कि युवक पहले से ही मेडिकल प्रवेश के लिए दबाव में था और दिव्यांग कोटे के जरिए दाखिला पाने की बात कर रहा था।

प्रेमिका के बयान के बाद पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच शुरू की गई।

प्रशासन और जांच एजेंसियों की भूमिका

सूचना मिलने के बाद संबंधित विभागों और पुलिस ने मामले को संज्ञान में लिया। मेडिकल रिपोर्ट, युवक के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह जांच की जा रही है कि, क्या ये दिव्यांग प्रमाण पत्र हासिल करने की साजिश थी? इसमें कोई अन्य व्यक्ति या एजेंट शामिल था या नहीं और मेडिकल और शैक्षणिक दस्तावेजों में कोई फर्जीवाड़ा हुआ है या नहीं।

अधिकारियों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दिव्यांग कोटे के दुरुपयोग पर उठे सवाल

ये मामला दिव्यांग कोटे की सत्यापन प्रक्रिया और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों से वास्तव में जरूरतमंद दिव्यांग छात्रों के अधिकारों को नुकसान पहुंचता है।

प्रशासनिक स्तर पर ये चर्चा भी शुरू हो गई है कि मेडिकल प्रवेश जैसी परीक्षाओं में मेडिकल बोर्ड की जांच को और सख्त किया जाए।

समाज के लिए चेतावनी और सीख

ये घटना केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि ये बताती है कि प्रतिस्पर्धा के दबाव में गलत फैसले कितने घातक हो सकते हैं। शॉर्टकट अपनाने की कोशिश जीवनभर का पछतावा बन सकती है और ईमानदारी और धैर्य ही लंबे समय में सही रास्ता है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई की प्रतीक्षा की जा रही है।

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