Ola, Uber, Rapido Strike: यदि आप ओला, उबर या रैपिडो जैसी ऐप-आधारित कैब सेवाओं का नियमित उपयोग करते हैं, तो 7 फरवरी को यात्रा की योजना बनाते समय सतर्क रहने की आवश्यकता है। देशभर में ड्राइवर यूनियनों ने इस दिन हड़ताल का आह्वान किया है, जिसके चलते कई बड़े शहरों में कैब, ऑटो और बाइक टैक्सी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इस प्रस्तावित हड़ताल को ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ नाम दिया गया है। इसका नेतृत्व तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) कर रही है, जिसे कई राष्ट्रीय श्रम संगठनों का समर्थन प्राप्त है।
यूनियनों के अनुसार, ऐप-आधारित ट्रांसपोर्ट वर्कर्स कम से कम 6 घंटे तक ऑफलाइन रह सकते हैं। यदि बड़ी संख्या में ड्राइवर इस हड़ताल में शामिल होते हैं, तो दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और अन्य महानगरों में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऑफिस जाने वाले लोगों, छात्रों और एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन की यात्रा करने वालों पर इसका विशेष असर पड़ने की संभावना है।
क्यों किया हड़ताल का आह्वान?
ड्राइवर संगठनों का आरोप है कि राइड-हेलिंग कंपनियां मनमाने ढंग से किराया और कमीशन तय करती हैं, जिससे उनकी आय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उनका कहना है कि मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस, 2025 लागू होने के बावजूद न्यूनतम बेस किराया अधिसूचित नहीं किया गया है। इससे ड्राइवरों की आमदनी में गिरावट आई है और काम करने की परिस्थितियां कठिन हुई हैं। यूनियनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि इस क्षेत्र में स्पष्ट और निष्पक्ष नियमन सुनिश्चित किया जा सके।
क्यों प्रभावित हो रही ड्राइवरों की कमाई?
यूनियन का ये भी कहना है कि निजी, गैर-व्यावसायिक वाहनों का कमर्शियल उपयोग रोका जाए और किराया निर्धारण की प्रक्रिया में ड्राइवर संगठनों से परामर्श किया जाए। उनका आरोप है कि मौजूदा प्रावधान एग्रीगेटर कंपनियों को बेस फेयर से कम किराया लेने की अनुमति देते हैं, जिससे ड्राइवरों की कमाई प्रभावित होती है।
यात्रियों के लिए सलाह है कि 7 फरवरी को यात्रा से पहले कैब उपलब्धता की स्थिति जांच लें और वैकल्पिक परिवहन की व्यवस्था रखें। हड़ताल की तीव्रता शहर और ड्राइवरों की भागीदारी पर निर्भर करेगी, लेकिन संभावित व्यवधान को देखते हुए पहले से तैयारी करना उचित रहेगा।
ये विरोध प्रदर्शन ऐप-आधारित ट्रांसपोर्ट सेक्टर में गिग वर्कर्स की आय और कार्य परिस्थितियों को लेकर बढ़ती असंतुष्टि को उजागर करता है। अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित कंपनियां इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती हैं।
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