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विनाश के कगार पर खड़ी दुनिया को केवल भारत ही दिखा सकता है शांति की राह, नागपुर में सरसंघचालक Dr. Mohan Bhagwat का बड़ा उद्घोष

Dr. Mohan Bhagwat
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नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत (Dr. Mohan Bhagwat) ने वैश्विक स्तर पर जारी युद्धों और बढ़ते तनावों के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण बयान दिया है। नागपुर में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में पूरी दुनिया विनाश के मुहाने पर खड़ी है और ऐसी स्थिति में केवल भारत ही वह शक्ति है जो विश्व को शांति और सद्भाव की राह दिखा सकता है।

वर्चस्व की भूख बना रही दुनिया को युद्ध का मैदान

डॉ. भागवत (Dr. Mohan Bhagwat) ने पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजरायल युद्ध और अन्य वैश्विक संघर्षों का विश्लेषण करते हुए कहा कि आज की दुनिया में जो हिंसा और तनाव दिख रहा है, उसके पीछे का असली कारण केवल ‘वर्चस्व’ की इच्छा है। उन्होंने कहा कि शक्तिशाली देश एक-दूसरे पर अपना प्रभाव थोपना चाहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप दुनिया विनाश के कगार पर पहुंच गई है।

जब दुनिया का ध्यान केवल खुद को श्रेष्ठ साबित करने और दूसरे को झुकाने पर होता है, तब मानवता के लिए संकट पैदा हो जाता है। ईरान-इजरायल संघर्ष इसी वर्चस्व की जंग का एक ताजा और भयावह उदाहरण है।डॉ. मोहन भागवत

भारत के पास है ‘विश्व को जोड़ने’ की शक्ति

संघ प्रमुख ने जोर देकर कहा कि आज पूरी दुनिया की नजरें भारत की ओर टिकी हैं। उन्होंने कहा कि विश्व भर से यह स्वर उठ रहा है कि भारत ही वह देश है जो इन भीषण युद्धों में ‘युद्ध विराम’ (Ceasefire) कराने और शांति स्थापित करने की क्षमता रखता है।

इसके पीछे उन्होंने भारत के मूल स्वभाव को कारण बताया:

 * सद्भाव का स्वभाव: भारत का इतिहास और संस्कृति कभी भी वर्चस्व की नहीं बल्कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (पूरी दुनिया एक परिवार है) की रही है।

 * मध्यस्थता की क्षमता: भारत किसी एक गुट का पक्ष लेने के बजाय सत्य और न्याय के पक्ष में खड़ा होता है, जिससे वह एक विश्वसनीय मध्यस्थ बनकर उभरता है।

* आध्यात्मिक शक्ति: भारत के पास वह नैतिक और आध्यात्मिक बल है जो बिखरते हुए विश्व को जोड़ने की ताकत रखता है।

विश्व हिंदू परिषद का संकल्प

विहिप के मंच से बोलते हुए सरसंघचालक ने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे भारत की इस सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि यदि भारत अपने आंतरिक सामर्थ्य और सद्भाव को बढ़ाता है, तो वह न केवल अपनी रक्षा करेगा बल्कि पूरी मानवता को एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण भविष्य भी प्रदान करेगा।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

डॉ. भागवत (Dr. Mohan Bhagwat) का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत जी-20 की अपनी सफल अध्यक्षता के बाद वैश्विक कूटनीति में एक ‘विश्वमित्र’ के रूप में उभरा है। उनके इस संबोधन को न केवल एक सांस्कृतिक संदेश, बल्कि एक कूटनीतिक दृष्टिकोण के रूप में भी देखा जा रहा है, जो भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करता है।

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