PM Modi Israel visit: कूटनीति के पन्नों पर एक नया अध्याय लिखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार शाम इजराइली संसद ‘कनेसेट’ को संबोधित किया। यह क्षण न केवल ऐतिहासिक था, बल्कि भावुक भी, क्योंकि मोदी इजराइली संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं। अपने संबोधन की शुरुआत हिब्रू और हिंदी के मेल ‘शालोम-नमस्ते’ से करते हुए पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच अटूट रिश्तों की नई इबारत लिखी।
आतंकवाद: साझा दर्द और साझा संकल्प
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में आतंकवाद को वैश्विक मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने इजराइल और भारत के बीच के साझा दर्द को रेखांकित करते हुए कहा:
- साझा जख्म: “चाहे वह इजराइल में हुआ अक्टूबर का भयावह हमला हो या मुंबई का 26/11 हमला, दोनों देशों ने आतंक का वीभत्स चेहरा देखा है।”
- निर्णायक जंग: पीएम ने संकल्प दोहराया कि भारत और इजराइल मिलकर दुनिया से आतंकवाद को उखाड़ फेंकने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति ही शांति का एकमात्र मार्ग है।
फिलिस्तीन और गाजा पीस प्लान: भारत का संतुलित रुख
दुनिया भर की नजरें इस बात पर थीं कि पीएम मोदी पश्चिम एशिया के संघर्ष पर क्या कहेंगे। उन्होंने भारत की दशकों पुरानी संतुलित विदेश नीति को दोहराते हुए कहा:
- शांतिपूर्ण समाधान: भारत हमेशा से फिलिस्तीन मुद्दे के शांतिपूर्ण और बातचीत के जरिए हल का समर्थक रहा है।
- गाजा पीस प्लान: पीएम मोदी ने आधिकारिक तौर पर गाजा पीस प्लान का समर्थन किया, जो पश्चिम एशिया में स्थिरता और शांति बहाली के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नेतन्याहू का ‘भाई’ संबोधन: अटूट दोस्ती की मिसाल
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रोटोकॉल तोड़कर पीएम मोदी का स्वागत किया। उन्होंने मोदी को “मेरा भाई” कहकर संबोधित किया और पिछले 8 वर्षों के संबंधों का लेखा-जोखा पेश किया:
- बहुआयामी सहयोग: नेतन्याहू ने कहा कि इन 8 सालों में कृषि, जल संरक्षण, रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग कई गुना बढ़ गया है।
- भविष्य की साझेदारी: उन्होंने भारत को इजराइल का सबसे विश्वसनीय और रणनीतिक साझेदार बताया।
संबोधन के मुख्य अंश: एक नजर में
विषय पीएम मोदी का मुख्य संदेश
- आतंकवाद भारत-इजराइल मिलकर इसे दुनिया से खत्म करेंगे।
- कूटनीति इजराइली संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय पीएम।
- शांति गाजा पीस प्लान का समर्थन और फिलिस्तीन पर संतुलित रुख।
- रिश्ते साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और नवाचार पर आधारित दोस्ती।
- यह दौरा न केवल रक्षा और व्यापार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की बढ़ती धमक को भी दर्शाता है।































