असम विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच पीएम मोदी ने बुधवार को राज्य के सबसे प्रभावशाली ‘टी ट्राइब्स’ (चाय जनजाति) के दिल में उतरने की कोशिश की। डिब्रूगढ़ के ऐतिहासिक ‘मनोहारी टी एस्टेट’ पहुंचकर प्रधानमंत्री ने न केवल सियासी संदेश दिया, बल्कि श्रमिकों के साथ एक आत्मीय रिश्ता भी जोड़ा। करीब आधे घंटे के इस दौरे ने असम की चुनावी फिजां में एक नई चर्चा छेड़ दी है।
जब श्रमिकों के बीच ‘चाय वाला’ बन गए प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रोटोकॉल किनारे रख चाय के बागानों में महिला श्रमिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चाय की पत्तियां चुनीं। संवाद के दौरान उन्होंने अपने अतीत की यादें साझा करते हुए भावनात्मक जुड़ाव पैदा किया। पीएम ने कहा— “आपको मालूम है, मैं भी चाय वाला रहा हूं… बचपन में चाय बेचता था। आपकी मेहनत की खुशबू मेरे गांव तक पहुंचती थी।” प्रधानमंत्री ने केवल काम की बात नहीं की, बल्कि श्रमिकों से उनके बच्चों की पढ़ाई, परिवार के स्वास्थ्य और घर की स्थिति को लेकर भी विस्तार से चर्चा की।
झूमर नृत्य की थाप और सेल्फी का क्रेज
काम के बाद प्रधानमंत्री ने श्रमिकों के सांस्कृतिक रंग का आनंद लिया। उन्होंने असम के प्रसिद्ध झूमर नृत्य को देखा और स्थानीय लोकगीतों को सुना। इस दौरान वे खुद को रोक नहीं पाए और तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन करते नजर आए। दौरे का सबसे खास पल तब आया जब एक महिला श्रमिक ने प्रधानमंत्री के साथ सेल्फी ली। पीएम ने न केवल खुशी-खुशी पोज दिया, बल्कि बाद में उस सेल्फी को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर भी किया, जो देखते ही देखते वायरल हो गई।
सियासी गणित: 45 सीटों की ‘चाबी’ है टी ट्राइब्स
प्रधानमंत्री का यह दौरा महज शिष्टाचार नहीं था, इसके पीछे गहरा राजनीतिक गणित छिपा है:
* बड़ा वोट बैंक: असम की करीब 3.5 करोड़ आबादी में 18-20% हिस्सा इसी टी ट्राइब्स समुदाय का है।
* हार-जीत का फैसला: राज्य की कुल 126 विधानसभा सीटों में से 45 सीटों पर यह समुदाय निर्णायक भूमिका निभाता है।
* रणनीतिक संदेश: चाय बागान के श्रमिकों के बीच जाकर पीएम मोदी ने सीधा संदेश दिया है कि उनकी सरकार अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के साथ है।
एक नज़र में दौरा:
विवरण प्रमुख बातें
स्थान मनोहारी टी एस्टेट, डिब्रूगढ़ समय बिताया करीब 30 मिनट
प्रमुख गतिविधि पत्तियां चुनना, संवाद, झूमर नृत्य देखना
प्रमुख संवाद मैं भी चाय वाला रहा हूं”
सियासी प्रभाव 45 विधानसभा सीटों पर सीधा असर
पीएम मोदी का यह ‘पर्सनल टच’ असम की चुनावी जंग में भाजपा के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है। चाय की खुशबू के बहाने उन्होंने 20% आबादी को यह अहसास दिलाने की कोशिश की है कि देश का प्रधानमंत्री उन्हीं के बीच से निकला हुआ एक ‘चाय वाला’ है।
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