Prince Andrew Arrest: ब्रिटिश राजघराने के सदियों पुराने इतिहास में आज का दिन ‘ब्लैक थर्सडे’ के रूप में दर्ज हो गया है। कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की फाइलों के सार्वजनिक होने के ठीक दो महीने बाद, दुनिया की पहली बड़ी गिरफ्तारी ने बकिंघम पैलेस की नींव हिला दी है। किंग चार्ल्स के छोटे भाई, 66 वर्षीय प्रिंस एंड्रयू (एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर) को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। विडंबना देखिए कि जिस दिन यह गिरफ्तारी हुई, उसी दिन उनका जन्मदिन भी था।
गंभीर आरोप: यौन शोषण से लेकर ‘राजद्रोह’ तक
प्रिंस एंड्रयू पर लगे आरोपों की फेहरिस्त लंबी और भयावह है। यदि ये आरोप कोर्ट में साबित हो जाते हैं, तो उन्हें अधिकतम उम्रकैद की सजा भुगतनी पड़ सकती है। मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:
- नाबालिग का यौन शोषण: एपस्टीन फाइल्स में जिक्र है कि एंड्रयू ने 2001 में एक 17 वर्षीय नाबालिग का शोषण किया था। दुखद पहलू यह है कि उस पीड़िता ने 2025 में आत्महत्या कर ली थी, जिससे यह मामला और भी संगीन हो गया है।
- सार्वजनिक पद का दुरुपयोग: उन पर आरोप है कि ब्रिटेन के ‘व्यापार प्रतिनिधि’ रहते हुए उन्होंने अपने पद की गरिमा को ताक पर रखा।
- गुप्त सूचनाओं का लीक होना: जाँच एजेंसियों के अनुसार, एंड्रयू ने 2001 में महत्वपूर्ण रणनीतिक और व्यापारिक गुप्त सूचनाएं लीक की थीं।
‘ऑपरेशन साइलेंस’: राजपरिवार भी रहा बेखबर
इस गिरफ्तारी की सबसे चौंकाने वाली बात इसकी गोपनीयता रही। सूत्रों के अनुसार, किंग चार्ल्स या राजपरिवार के किसी भी सदस्य को इस कार्रवाई की भनक तक नहीं लगने दी गई।
पूरी योजना केवल दो लोगों के संज्ञान में थी:
- प्रधानमंत्री कीर स्टारमर
- गृह मंत्री शबाना महमूद
प्रधानमंत्री स्टारमर ने 1 फरवरी को ही एंड्रयू को अमेरिकी संसद में गवाही देने की सलाह देकर भविष्य के घटनाक्रमों का संकेत दे दिया था। अब पुलिस के पास उन्हें अदालत में पेश करने के लिए 96 घंटे का समय है।
305 साल की परंपरा टूटी
ब्रिटेन के संवैधानिक राजतंत्र के 305 साल के इतिहास में यह पहली बार है जब शाही परिवार के किसी सदस्य को अपराधी के रूप में गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले साल 2001 में प्रिंसेस एन पर सार्वजनिक नियमों के उल्लंघन के लिए मात्र 5 हजार रुपये का जुर्माना लगा था, लेकिन ‘गिरफ्तारी’ शब्द राजघराने की डिक्शनरी से बाहर था।
क्या होगा आगे?
प्रिंस एंड्रयू की गिरफ्तारी के बाद अब ब्रिटेन में राजशाही के अस्तित्व और ‘कानून के सामने सब बराबर हैं’ के सिद्धांत पर बहस तेज हो गई है।
- अगला कदम: 96 घंटों के भीतर कोर्ट में पेशी और रिमांड की मांग।
- वैश्विक प्रभाव: एपस्टीन मामले से जुड़े अन्य रसूखदार लोगों में अब खलबली मचना तय है, क्योंकि एंड्रयू की गिरफ्तारी ने साफ कर दिया है कि ‘फाइल्स’ के खुलासे अब केवल कागजी नहीं रहेंगे।
यह गिरफ्तारी किंग चार्ल्स के शासनकाल की सबसे बड़ी चुनौती है। एक तरफ भाई का मोह है और दूसरी तरफ कानून की शुचिता। दुनिया की नजरें अब लंदन की अदालतों पर टिकी हैं।































