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पुणे के वैज्ञानिकों का बड़ा धमाका: अब AI खोजेगा जमीन के नीचे छिपा ‘काला सोना’, चंद घंटों में होगा तेल उत्पादन का सटीक अनुमान

पुणे
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पुणे: वैश्विक ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच पुणे की एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT-WPU) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो पेट्रोलियम इंडस्ट्री में क्रांति ला सकती है। आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) पर आधारित यह उन्नत मॉडल न केवल पुराने तेल भंडारों से अधिक तेल निकालने में मदद करेगा, बल्कि भविष्य के उत्पादन का सटीक खाका भी पेश करेगा।

महीनों का काम अब चंद घंटों में: समय और लागत की बड़ी बचत
पारंपरिक रूप से तेल भंडारों (Reservoirs) की क्षमता मापने और रिकवरी रणनीति बनाने में वैज्ञानिकों को कई महीनों का समय लग जाता था। लेकिन एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के पेट्रोलियम इंजीनियरिंग विभाग द्वारा विकसित यह एआई मॉडल इस पूरी प्रक्रिया को कुछ ही घंटों में समेट देता है।

* सटीक मूल्यांकन: यह मॉडल डेटा का विश्लेषण कर यह बता सकता है कि किस कुएं से कितना तेल निकलना बाकी है।
* कुशल प्रबंधन: पुराने हो चुके तेल भंडारों (Mature Fields) से तेल निकालना तकनीकी रूप से कठिन होता है, लेकिन एआई आधारित यह तकनीक उन जटिल चुनौतियों का समाधान पेश करती है।

डॉ. राजीव कुमार सिन्हा के नेतृत्व में मिली बड़ी कामयाबी
इस अभूतपूर्व शोध का नेतृत्व पेट्रोलियम इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजीव कुमार सिन्हा कर रहे हैं। इस टीम में पीएचडी छात्र डॉ. ऋषिकेश के. चव्हाण और अन्य शोधकर्ता शामिल हैं। टीम ने पेट्रोलियम भंडार प्रबंधन (Reservoir Management) की गुत्थियों को सुलझाने के लिए मशीन लर्निंग के एल्गोरिदम का इस्तेमाल किया है, जो उत्पादन के पैटर्न को समझकर भविष्य की सटीक भविष्यवाणी करता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह तकनीक?
वर्तमान में दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव (जैसे ईरान-इजराइल संघर्ष) के कारण तेल की आपूर्ति बाधित हो रही है। ऐसे में भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, अपने मौजूदा भंडारों से अधिकतम उत्पादन करना अनिवार्य है।

* ऊर्जा सुरक्षा: घरेलू तेल उत्पादन बढ़ने से विदेशी निर्भरता कम होगी।
* लागत में कमी: एआई मॉडल के कारण ड्रिलिंग और परीक्षण में होने वाले अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगेगी।
* पुराने कुओं को नया जीवन: यह मॉडल उन भंडारों से भी तेल निकालने की राह आसान करेगा जिन्हें अब तक ‘खाली’ मान लिया गया था।

भविष्य की ऊर्जा राह: डेटा और तकनीक का संगम
पुणे के इन वैज्ञानिकों ने साबित कर दिया है कि एआई केवल चैटिंग या कोडिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ भी बन सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस तकनीक के कमर्शियल इस्तेमाल से तेल और गैस कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमता में कई गुना इजाफा कर सकती हैं।

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