Rafale Deal: भारतीय वायुसेना (IAF) की घटती लड़ाकू क्षमता को पुनर्जीवित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक युगांतकारी कदम उठाया है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने गुरुवार को फ्रांस से 114 राफेल विमानों की खरीद के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। यह न केवल भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की स्थिति को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
सौदे का आर्थिक ढांचा: 3.25 लाख करोड़ की विशाल डील
इस सौदे की कुल लागत रक्षा विशेषज्ञों और सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। हालांकि, यदि इसमें अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों और लंबी अवधि के रखरखाव (Weapon Package) को जोड़ दिया जाए, तो यह आंकड़ा 4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
- विमानों पर खर्च: 3.25 लाख करोड़ रुपये।
- हथियार पैकेज: लगभग 75 हजार करोड़ रुपये।
- अनुबंध की समय सीमा: अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर इसी वर्ष के अंत या 2027 की शुरुआत तक होने की संभावना है।
‘मेक इन इंडिया’ को पंख: 96 विमानों का भारत में निर्माण
इस सौदे की सबसे बड़ी विशेषता इसका निर्माण मॉडल है। प्रधानमंत्री मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत:
- तैयार विमान (Fly-away): फ्रांसीसी कंपनी ‘दसॉ एयरोस्पेस’ से 18 विमान उड़ने की स्थिति में मिलेंगे।
- स्वदेशी निर्माण: बाकी 96 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा।
- स्वदेशी सामग्री: इन विमानों में 60% कलपुर्जे भारतीय होंगे, जो देश की सूक्ष्म और लघु रक्षा इकाइयों (MSMEs) के लिए स्वर्ण अवसर है।
वायुसेना की मजबूरी और जरूरत
भारतीय वायुसेना वर्तमान में लड़ाकू स्क्वाड्रन की भारी कमी से जूझ रही है।
- वर्तमान स्थिति: वायुसेना के पास स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन के मुकाबले केवल 30 स्क्वाड्रन शेष हैं।
- मिग-21 की विदाई: हाल ही में पुराने पड़ चुके मिग-21 विमानों को रिटायर किया गया है, जिससे पैदा हुए शून्य को भरने के लिए राफेल जैसे ‘4.5 जनरेशन’ के विमान अनिवार्य हैं।
- भविष्य की सुरक्षा: 13 साल पहले शुरू हुई एमएमआरसीए (MMRCA) प्रक्रिया के विफल होने के बाद, यह नया सौदा वायुसेना के लिए जीवनदान साबित होगा।
वैश्विक केंद्र बनेगा भारत: हैदराबाद या नागपुर में असेंबली लाइन
फ्रांस के बाद भारत दुनिया का सबसे बड़ा राफेल हब बनने जा रहा है।
- निर्माण केंद्र: राफेल की असेंबली लाइन हैदराबाद या नागपुर में स्थापित की जा सकती है।
- जॉइंट वेंचर: ‘दसॉ रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड’ (DRAL) इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व करेगी। रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस अपनी हिस्सेदारी टाटा या महिंद्रा जैसी अन्य अनुभवी भारतीय कंपनियों को बेच सकती है।
- निर्यात की संभावना: भारत में बनने वाले राफेल विमानों को भविष्य में अन्य मित्र देशों को भी निर्यात (Export) किया जा सकेगा।
दुनिया का सबसे बड़ा राफेल बेड़ा
इस सौदे के पूरे होने के बाद भारत के पास राफेल विमानों की संख्या कुछ इस प्रकार होगी:
विमान का प्रकार संख्या
| क्रमांक | श्रेणी | संख्या |
|---|---|---|
| 1 | पहले से मौजूद राफेल (IAF) | 36 |
| 2 | नौसेना के लिए ऑर्डर (Rafale-M) | 26 |
| 3 | नए सौदे के तहत (IAF) | 114 |
| 4 | कुल संभावित बेड़ा | 176 |
यह संख्या फ्रांस की वायुसेना के पास मौजूद राफेल की संख्या से भी अधिक होगी, जिससे भारत दुनिया में इन विमानों का सबसे बड़ा संचालक बन जाएगा।
अगला महत्वपूर्ण पड़ाव
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का 17 फरवरी से शुरू होने वाला तीन दिवसीय भारत दौरा इस डील के लिए मील का पत्थर साबित होगा। डीएसी की मंजूरी के बाद, अब गेंद ‘सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति’ (CCS) के पाले में है, जहाँ से अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य की रूपरेखा तैयार हो जाएगी।






























