महाराष्ट्र

Raghuji Bhosale Sword: रघुजी भोसले की ऐतिहासिक तलवार लंदन से जुलाई अंत तक महाराष्ट्र आएगी!

Raghuji Bhosale Sword: रघुजी भोसले की ऐतिहासिक तलवार लंदन से जुलाई अंत तक महाराष्ट्र आएगी!

Raghuji Bhosale Sword: महाराष्ट्र के इतिहास और मराठा शौर्य की एक अनमोल निशानी जल्द ही अपनी मिट्टी में वापस आने वाली है। रघुजी भोसले, जो नागपुर के भोसले राजवंश के संस्थापक और मराठा सेना के महान सेनापति थे, उनकी ऐतिहासिक तलवार अब लंदन से महाराष्ट्र लौट रही है। इस तलवार को अप्रैल 2025 में लंदन की मशहूर नीलामी कंपनी सॉदबीज में नीलाम किया गया था। महाराष्ट्र सरकार ने तेजी से कदम उठाते हुए इस मराठा तलवार नीलामी में ₹69,94,437 की बोली लगाकर इसे अपने नाम किया। सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशिष शेलार ने विधानमंडल में यह खुशखबरी दी कि यह तलवार जुलाई के आखिरी हफ्ते या 15 अगस्त से पहले महाराष्ट्र पहुंच जाएगी।

रघुजी भोसले का नाम मराठा इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा है। 1695 से 1755 तक जीवित रहे रघुजी ने छत्रपति शाहू महाराज के शासनकाल में मराठा सेना का नेतृत्व किया। उनकी वीरता और युद्ध रणनीतियों से प्रभावित होकर शाहू महाराज ने उन्हें ‘सेना साहेब सुभा’ का सम्मानजनक खिताब दिया था। रघुजी ने बंगाल, ओडिशा और दक्षिण भारत में कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियान चलाए, जिनसे मराठा साम्राज्य का विस्तार हुआ। उनकी यह तलवार, जिस पर सोने की जड़ाई और देवनागरी में उनका नाम खुदा है, उस दौर की मराठा शौर्य गाथा की गवाह है।

यह तलवार ‘फिरंगी’ शैली की है, जिसमें यूरोपीय स्टील से बनी सीधी, एकधारी ब्लेड और स्थानीय मुल्हेरी हैंडल का इस्तेमाल हुआ है। तलवार के हैंडल पर सोने की नक्काशी और हरे कपड़े की मूठ इसे और खास बनाती है। ब्लेड पर देवनागरी में लिखा है, “श्रीमंत रघुजी भोसले सेना साहेब सुभा फिरंग”। इतिहासकारों का मानना है कि यह तलवार 1817 में सिताबुल्दी की लड़ाई के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा लूटी गई थी, जब नागपुर के भोसले राजवंश को ब्रिटिश सेना ने हराया और उनकी खजाने से कीमती सामान ले गए।

जब अप्रैल में खबर आई कि रघुजी भोसले की यह तलवार लंदन में नीलाम होने वाली है, तो महाराष्ट्र सरकार ने तुरंत हरकत में आ गई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में सांस्कृतिक कार्य विभाग ने भारतीय दूतावास से संपर्क किया और नीलामी में हिस्सा लिया। प्रवीण चला के जरिए सरकार ने ₹69,94,437 (टैक्स सहित) की बोली लगाई, जो सॉदबीज में 29 अप्रैल 2025 को स्वीकार हो गई। 21 मई 2025 को इस सौदे को अंतिम मंजूरी मिली। नागपुर के भोसले राजवंश के वंशज राजे मुधोजी भोसले ने भी इस नीलामी में हिस्सा लिया था और ₹35 लाख तक की बोली लगाई थी, लेकिन जब उन्हें पता चला कि राज्य सरकार भी बोली लगा रही है, तो उन्होंने सरकार का समर्थन किया।

इस तलवार को भारत लाने की जिम्मेदारी स्टार वर्ल्डवाइड ग्रुप प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी गई है, जो कस्टम्स क्लियरेंस, पैकिंग और सुरक्षित परिवहन का काम देख रही है। मंत्री शेलार ने बताया कि यह तलवार मराठा साहस, गौरव और विरासत का प्रतीक है। इसे महाराष्ट्र के लोगों के लिए सम्मान के साथ प्रदर्शित किया जाएगा, शायद किसी संग्रहालय या ऐतिहासिक केंद्र में। नागपुर के मुधोजी भोसले ने इस तलवार को शहर में लाने की इच्छा जताई है और एक मराठा विरासत संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव भी रखा है, जहां इसे केंद्रबिंदु बनाया जा सके।

यह पहली बार है जब महाराष्ट्र सरकार ने किसी अंतरराष्ट्रीय नीलामी में ऐतिहासिक वस्तु को वापस लाने में सफलता पाई है। इससे पहले 2023 में छत्रपति शिवाजी महाराज के ‘वाघनख’ को तीन साल के लिए लोन पर भारत लाया गया था। रघुजी भोसले की यह तलवार न सिर्फ एक हथियार है, बल्कि मराठा इतिहास का एक जीवंत प्रतीक है, जो नागपुर से बंगाल तक उनके युद्धों की कहानियां सुनाती है।

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