महाराष्ट्र

राज ठाकरे ने फिर गंगा जल को लेकर दिया बड़ा बयान, बोले – मंदिर जाउंगा लेकिन गंगा का पानी नहीं पिऊंगा

राज ठाकरे
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महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) समेत 29 महानगरपालिकाओं के आगामी चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सभी राजनीतिक दल मतदाताओं को साधने में जुटे हैं और इसी बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे का एक बयान चर्चा में आ गया है। शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र सामना को दिए गए एक इंटरव्यू में राज ठाकरे ने धर्म, हिंदुत्व और ‘मराठी मुसलमान’ को लेकर अपनी बेबाक राय रखी।

मंदिर और गंगा को लेकर राज ठाकरे की टिप्पणी

इंटरव्यू के दौरान शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने राज ठाकरे से सवाल किया कि क्या उन्हें हिंदुत्व विरोधी होने की आलोचना झेलनी पड़ सकती है। इस पर राज ठाकरे ने कहा,
“इसका हिंदुत्व से क्या संबंध है? मान लीजिए मैं कल मंदिर में जाकर माथा टेकता हूं और आप मुझसे कहते हैं कि गंगा का पानी पियो, तो मैं नहीं पिऊंगा। गंगा जहां से निकलती है, वहां का पानी शायद पी लूं।”

राज ठाकरे ने साफ किया कि उनकी बात आस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि गंगा नदी की वर्तमान स्थिति और उसके पानी की गुणवत्ता को लेकर है। गौरतलब है कि इससे पहले भी वो गंगा की स्वच्छता पर सवाल उठा चुके हैं और कह चुके हैं कि वो प्रदूषित पानी में आस्था के नाम पर डुबकी नहीं लगाएंगे।

हिंदुत्व की व्याख्या पर दिया अपना नजरिया

राज ठाकरे ने कहा कि हिंदुत्व को एक ही नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक,
“हर राज्य का हिंदू अलग होता है, क्योंकि हर राज्य की संस्कृति अलग होती है। इसी तरह हर राज्य का मुसलमान भी अलग होता है।”

‘मराठी मुसलमान’ का मुद्दा उठाकर दिया नया राजनीतिक संकेत

राज ठाकरे ने इस इंटरव्यू में ‘मराठी मुसलमान’ का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में पीढ़ियों से रहने वाले मुसलमान, जो मराठी भाषा और संस्कृति से जुड़े हैं, उन्हें ‘मराठी मुसलमान’ कहा जाना चाहिए।

उन्होंने साल 2009–10 की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय हज कमेटी के दफ्तर पर आंदोलन किया गया था, क्योंकि वहां उत्तर प्रदेश और बिहार से आए लोगों का वर्चस्व था और महाराष्ट्र के मराठी मुसलमानों को हज यात्रा में प्राथमिकता नहीं मिल रही थी। राज ठाकरे के अनुसार, उस आंदोलन में उनकी पार्टी ने सक्रिय भूमिका निभाई थी।

मराठी पहचान पर जोर

राज ठाकरे ने उदाहरण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र में कई मुसलमान परिवार पीढ़ियों से रह रहे हैं और वे मराठी समाज का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने अपने परिचितों का जिक्र करते हुए कहा,
“हमारे सलीम मामा हैं, वे मराठी मुसलमान हैं। क्रिकेटर जहीर खान भी मराठी हैं, संगमनेर के। जब भी हम मिलते हैं, मराठी में ही बात करते हैं।”

उद्धव ठाकरे की भी प्रतिक्रिया

इंटरव्यू के दौरान शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी कहा कि वो हाल ही में अपने एक मुस्लिम उम्मीदवार के चुनाव कार्यालय गए थे, जो ये दर्शाता है कि महाराष्ट्र की राजनीति में सामाजिक समावेशन एक अहम मुद्दा बना हुआ है।

चुनावी माहौल में बयान के मायने

बीएमसी चुनाव से पहले राज ठाकरे का ये बयान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि ये स्वच्छता, क्षेत्रीय पहचान और सामाजिक विविधता जैसे मुद्दों को भी छूता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयान मराठी अस्मिता और स्थानीय मुद्दों को केंद्र में लाने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।

कुल मिलाकर, राज ठाकरे का ये बयान आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस और समीकरण पैदा कर सकता है।

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