Rajya Sabha Elections 2026: देश की राजनीति के लिए साल 2026 बदलाव का एक बड़ा मोड़ साबित होने जा रहा है। निर्वाचन आयोग ने 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर आगामी 16 मार्च को चुनाव कराने की घोषणा कर दी है। इन चुनावों के नतीजे न केवल उच्च सदन (Rajya Sabha) का अंकगणित बदल देंगे, बल्कि केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण विधायी फैसलों पर और अधिक मजबूती प्रदान करेंगे।
चुनाव का कार्यक्रम और प्रक्रिया
निर्वाचन आयोग के अनुसार, इन सीटों के लिए मतदान 16 मार्च को होगा और नियमानुसार उसी दिन शाम 5 बजे से मतों की गिनती शुरू हो जाएगी। ये सभी सीटें 2 और 9 अप्रैल को वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने के कारण खाली हो रही हैं।
अंकगणित: एनडीए की ‘जादुई’ बढ़त की ओर कदम
वर्तमान में राज्यसभा की 245 सीटों की स्थिति देखें तो भाजपा और उसके सहयोगी दल (NDA) पहले से ही मजबूत स्थिति में हैं।
- NDA की वर्तमान ताकत: 126 सीटें
- INDIA गठबंधन: 80 सीटें
- अनुमानित बदलाव: इस चुनाव के बाद एनडीए का आंकड़ा 145 तक पहुंचने की संभावना है।
यह बढ़त क्यों?
जिन 10 राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, उनमें से 6 राज्यों (महाराष्ट्र, बिहार, हरियाणा, असम, छत्तीसगढ़ और ओडिशा) में भाजपा या एनडीए की सरकारें हैं। विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा इन राज्यों में अधिकतम सीटें झटकने की तैयारी में है।
राज्यों का समीकरण: कहाँ कितनी सीटें?
सबसे दिलचस्प मुकाबला महाराष्ट्र में देखने को मिलेगा, जहाँ सर्वाधिक 7 सीटें खाली हो रही हैं। यदि विपक्षी ‘महा विकास अघाड़ी’ एकजुट रहता है, तो वह महज एक सीट बचाने में सफल हो सकता है।
| राज्य | सीटें | सत्ता पक्ष / स्थिति |
|---|---|---|
| महाराष्ट्र | 7 | महायुति (NDA) का पलड़ा भारी |
| तमिलनाडु | 6 | DMK का वर्चस्व |
| बिहार | 5 | NDA को लाभ की उम्मीद |
| पश्चिम बंगाल | 5 | TMC का गढ़ |
| ओडिशा | 4 | भाजपा/BJD समीकरण |
| असम | 3 | NDA का प्रभाव |
| तेलंगाना | 3 | कांग्रेस का प्रभाव |
| हरियाणा | 2 | BJP का वर्चस्व |
| छत्तीसगढ़ | 2 | BJP का प्रभाव |
| हिमाचल प्रदेश | 1 | कांग्रेस का प्रभाव |
बड़े दिग्गजों की साख दांव पर
इस चुनावी चक्र में देश की राजनीति के कई दिग्गज चेहरे रिटायर हो रहे हैं। इनमें से कई की वापसी उनके गठबंधन की एकजुटता और विधायकों की संख्या पर निर्भर करेगी:
विधायी शक्ति का नया केंद्र
| श्रेणी | नाम | दल |
|---|---|---|
| विपक्ष | शरद पवार | एनसीपी (NCP) |
| विपक्ष | अभिषेक मनु सिंघवी | कांग्रेस |
| विपक्ष | प्रियंका चतुर्वेदी | शिवसेना (UBT) |
| विपक्ष | साकेत गोखले | टीएमसी (TMC) |
| सत्ता पक्ष / अन्य | रामदास अठावले | आरपीआई (A) |
| सत्ता पक्ष / अन्य | हरिवंश सिंह | जदयू (JDU) |
| सत्ता पक्ष / अन्य | एम. थंबीदुरई | एआईएडीएमके (AIADMK) |
साल 2026 के अंत तक कुल 72 से 75 सीटें खाली होनी हैं। यदि भाजपा नेतृत्व वाला एनडीए 145 के आंकड़े को छू लेता है, तो सदन में बहुमत का संकट पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। इससे सरकार को संविधान संशोधन जैसे बड़े और कड़े बिल पास कराने में किसी बाहरी दल के समर्थन की आवश्यकता नहीं रहेगी।
विपक्ष के लिए चुनौती सिर्फ सीटें बचाने की नहीं, बल्कि अपने कुनबे को एकजुट रखने की भी होगी, क्योंकि राज्यसभा चुनावों में अक्सर ‘क्रॉस वोटिंग’ का साया मंडराता रहता है।































