महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों दो बड़े विवाद सुर्खियों में हैं। पहला विवाद छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के खुल्दाबाद में स्थित मुगल सम्राट औरंगजेब की मजार को हटाने की मांग को लेकर उठा है। वीएचपी और बजरंग दल जैसे हिंदू संगठनों ने इस मजार को हटाने की मांग की है। वहीं, दूसरा विवाद मशहूर कॉमेडियन कुणाल कामरा के एक स्किट को लेकर है, जिसमें उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत कई नेताओं का मजाक उड़ाया। इस विवाद के बाद शिवसेना कार्यकर्ताओं ने एक मुस्लिम स्टूडियो में तोड़फोड़ की, और कामरा सहित कुछ अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत की और अपनी राय रखी।
‘छावा’ फिल्म के बाद बढ़ी नाराजगी
रामदास अठावले का कहना है कि औरंगजेब की मौत 1707 में हुई थी, लेकिन पिछले 300 वर्षों में उनकी मजार को हटाने का मुद्दा कभी नहीं उठा। ये विवाद तब गहराया जब छत्रपति संभाजी महाराज पर आधारित ‘छावा’ फिल्म रिलीज हुई। अठावले के मुताबिक, लोगों को पहले से पता था कि औरंगजेब ने संभाजी महाराज की हत्या करवाई थी, लेकिन जब ये फिल्म आई तो दर्शकों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा। फिल्म ने लोगों की भावनाओं को झकझोर दिया, जिससे ये मांग और तेज हो गई।
कुणाल कामरा विवाद: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम भावनाओं का सम्मान
कुणाल कामरा द्वारा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर किए गए व्यंग्यात्मक स्किट पर अठावले ने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होनी चाहिए, लेकिन किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हिंसा या तोड़फोड़ किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। अगर किसी को किसी बयान से आपत्ति है, तो इसका समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए, न कि हिंसा के जरिए।
महाराष्ट्र में शांति और सद्भाव जरूरी
रामदास अठावले ने अंत में अपील की कि महाराष्ट्र में शांति और सद्भाव बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। ऐतिहासिक मुद्दे या राजनीतिक मतभेदों को हिंसा में बदलना सही नहीं है।
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