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पशुपालन में क्रांति: अब IVF तकनीक से बढ़ेगी गायों की दूध उत्पादन क्षमता

IVF
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भारत में पशुपालन और डेयरी सेक्टर को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा वैज्ञानिक कदम उठाया गया है। अब आधुनिक तकनीक की मदद से ऐसी बछिया तैयार की जा रही है, जो सामान्य गाय की तुलना में कई गुना अधिक दूध देने में सक्षम होगी। ये बदलाव इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) तकनीक के जरिए संभव हो रहा है, जिसे अब गाय-भैंसों पर भी सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है।

क्या है पशुओं में IVF तकनीक?

IVF यानी इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें मादा के अंडाणु (एग) और नर के शुक्राणु (स्पर्म) को प्रयोगशाला में मिलाकर भ्रूण (Embryo) तैयार किया जाता है। इसके बाद इस भ्रूण को पशु के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है।

अब यही तकनीक पशुओं में नस्ल सुधार और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए उपयोग की जा रही है, जिससे बेहतर गुणवत्ता वाली संतति पैदा हो सके।

भारतीय कंपनी की पहल

BL Agro की सहायक कंपनी Leads Genetics ने इस दिशा में अहम पहल की है। कंपनी ने ब्राजील की संस्था Fazenda Floresta के सहयोग से भारत में उच्च गुणवत्ता वाले भ्रूण का प्रत्यारोपण शुरू किया है।

इस परियोजना के तहत अब तक सैकड़ों गायों में उन्नत नस्ल के भ्रूण ट्रांसफर किए जा चुके हैं, जिनमें अच्छी सफलता दर भी देखने को मिली है।

कैसे तैयार किए जाते हैं हाई-क्वालिटी भ्रूण?

विशेषज्ञों के अनुसार, इन भ्रूणों को तैयार करने के लिए ऐसी गायों का चयन किया जाता है, जिनकी दूध देने की क्षमता बहुत अधिक होती है। उदाहरण के तौर पर, गिर नस्ल की उन गायों के अंडाणु लिए जाते हैं, जो प्रतिदिन 40 लीटर तक दूध देती हैं।

इसके साथ ही ऐसे सांढ़ का स्पर्म लिया जाता है, जिसकी मां भी उच्च दूध उत्पादन क्षमता वाली रही हो। इस वैज्ञानिक चयन के जरिए बेहतर जीन (Genetics) वाली संतति तैयार की जाती है।

बछिया ही होने की संभावना अधिक

इस तकनीक का एक महत्वपूर्ण पहलू ये है कि इसमें ‘एक्स’ और ‘वाई’ क्रोमोसोम को अलग कर केवल ‘एक्स’ क्रोमोसोम का उपयोग किया जाता है। इससे लगभग 90% मामलों में बछिया (मादा) पैदा होने की संभावना रहती है, जो आगे चलकर दूध उत्पादन में योगदान देती है।

दूध उत्पादन में बड़ा बदलाव

भारत में जहां सामान्य देसी गाय औसतन 4 से 5 लीटर दूध प्रतिदिन देती है, वहीं इस तकनीक से पैदा होने वाली बछिया जब बड़ी होकर गाय बनेगी, तो वो 40 से 45 लीटर तक दूध दे सकती है।

ये तकनीक खासतौर पर गिर, साहीवाल और होल्स्टीन फ्रीजियन नस्लों पर लागू की जा रही है, जिससे देश में प्रति पशु दूध उत्पादन बढ़ाया जा सके।

ब्राजील से जुड़ी खास कहानी

गिर नस्ल की गायों का ब्राजील से खास संबंध है। कई दशक पहले भारत से ये नस्ल ब्राजील पहुंची, जहां वैज्ञानिकों ने लंबे समय तक चयनात्मक प्रजनन (Selective Breeding) के जरिए इसकी गुणवत्ता को और बेहतर बनाया। अब वही उन्नत नस्ल एक बार फिर आधुनिक तकनीक के जरिए भारत लाई जा रही है।

सफलता दर और भविष्य की संभावनाएं

इस प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण में करीब 60% गर्भधारण सफलता दर दर्ज की गई है, जो कि इंडस्ट्री मानकों के हिसाब से काफी बेहतर मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही देखभाल और निगरानी के जरिए इस तकनीक से पशुपालकों की आय में बड़ा इजाफा हो सकता है।

IVF तकनीक का पशुपालन में उपयोग न केवल दूध उत्पादन बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि ये किसानों और डेयरी उद्योग के लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित हो सकता है। आने वाले समय में ये तकनीक भारत के डेयरी सेक्टर को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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