बिहार की कानून-व्यवस्था को धता बताते हुए अपराधियों ने शनिवार को पटना में एक ऐसी दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया, जिसने पुलिस प्रशासन की चौकसी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी के खगौल लख के पास लुटेरों ने फिल्मी अंदाज में गुजरात के राजकोट के एक बड़े स्वर्ण कारोबारी के कर्मचारियों को अपना निशाना बनाया और 20 करोड़ रुपए मूल्य के करीब 15 किलो सोने के जेवरात लूटकर रफूचक्कर हो गए।
1. ‘वर्दी’ का झांसा और अपहरण: वारदात की पूरी कहानी
राजकोट के सोना कारोबारी सुनीलजी के दो कर्मचारी, महेश मामतोरा और प्रिंस रामपरिया, करोड़ों के जेवरात लेकर जा रहे थे। तभी खगौल लख के पास अपराधियों ने उन्हें घेर लिया।
* नियोजित घेराबंदी: अपराधी दो बाइकों और एक सफेद बलेनो कार में सवार होकर आए थे।
* नकली पहचान: लुटेरों ने खुद को ‘कस्टम अधिकारी’ बताया और जांच के नाम पर कर्मचारियों को डराया-धमकाया।
* अपहरण और क्रूरता: उन्होंने दोनों कर्मचारियों को जबरन अपनी कार में बिठा लिया और अपहरण कर लिया। एक सुनसान इलाके में ले जाकर अपराधियों ने उनके हाथ-पैर और मुंह बांध दिए और उन्हें वहीं फेंक कर गहनों से भरा बैग लेकर फरार हो गए।
2. 20 करोड़ की डकैती: राजकोट से पटना तक जुड़ा तार
लुटेरों के पास सटीक जानकारी थी कि कर्मचारी कब और किस रास्ते से सोना लेकर गुजरने वाले हैं। 15 किलो सोने के गहनों की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार लगभग 20 करोड़ रुपए आंकी जा रही है। इतनी बड़ी रकम और सोने की खेप की जानकारी लीक होना किसी बड़े गिरोह या ‘इनसाइडर’ की संलिप्तता की ओर इशारा करती है।
3. पुलिस की कार्रवाई: SIT का गठन
वारदात की सूचना मिलते ही पटना पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। दानापुर एसडीपीओ वन शिवम धाकड़ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए हैं।
* विशेष जांच दल (SIT): अपराधियों की धरपकड़ के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।
* CCTV खंगाल रही पुलिस: पुलिस घटनास्थल और लुटेरों के भागने के संभावित रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है। सफेद बलेनो कार की पहचान करना पुलिस के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
4. ‘कस्टम’ के नाम पर लूट का नया ट्रेंड
हाल के दिनों में बिहार में अपराधियों द्वारा जांच एजेंसी (सीबीआई, कस्टम या पुलिस) का मुखौटा पहनकर लूटपाट करने के मामले बढ़े हैं। यह पैटर्न बताता है कि अपराधी अब सीधे टकराव के बजाय ‘पहचान के भ्रम’ का फायदा उठा रहे हैं, जिससे आम नागरिक या व्यापारी शुरुआत में विरोध नहीं कर पाते।
सुरक्षा पर गहराता संकट
दिनदहाड़े हुई 20 करोड़ की इस लूट ने पटना को दहला दिया है। व्यापारियों में इस घटना के बाद भारी आक्रोश और डर का माहौल है। अब सबकी निगाहें बिहार पुलिस और नवगठित एसआईटी पर टिकी हैं—क्या वे इन ‘नकली कस्टम अधिकारियों’ के असली चेहरों को बेनकाब कर पाएंगे और लूटा गया सोना बरामद होगा।
बिहार में अपराधी अब केवल हथियार नहीं, बल्कि ‘पहचान’ को भी हथियार बना रहे हैं। राजधानी में हुई यह लूट सुशासन के दावों पर एक बड़ा प्रहार है।































