राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता और विधायक रोहित पवार ने अपने चाचा और वरिष्ठ नेता अजित पवार के निधन के बाद सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक पोस्ट साझा की है। अंतिम संस्कार के दूसरे दिन लिखी गई ये पोस्ट सिर्फ एक भतीजे का दुख नहीं, बल्कि एक नेता, मार्गदर्शक और जनसेवक को खोने की पीड़ा को बयां करती है।
रोहित पवार ने लिखा कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस जमीन पर अजित दादा ने विकास के फूलों की बगिया लगाई, उसी जगह उनकी अस्थियों को समेटना पड़ेगा। उन्होंने इसे नियति का क्रूर खेल बताया और कहा कि इस खबर के बाद से उनका मन और दिमाग सुन्न हो गया है।
उन्होंने लिखा कि “क्या हुआ, कैसे हुआ और क्यों हुआ”- ये सवाल लगातार मन में घूम रहे हैं। हाल के दिनों में अजित दादा से हुई भावनात्मक बातचीत आज भी किसी टेप रिकॉर्डर की तरह कानों में गूंज रही है। ऐसा लगता है जैसे वे अदृश्य रूप में आज भी बोल रहे हों।
रोहित पवार ने अपने पोस्ट में अजित पवार के व्यक्तित्व को याद करते हुए लिखा कि उनकी काम करने की शैली, प्रशासन पर पकड़, राजनीति की गहरी समझ, साफगोई और समय की पाबंदी उन्हें सबसे अलग बनाती थी। सत्ता में हों या न हों, उनका प्रभाव हमेशा महसूस होता था। बाहर से सख्त दिखने वाले अजित पवार, करीब आने पर बेहद संवेदनशील और अपनापन देने वाले इंसान थे।
उन्होंने ये सवाल भी उठाया कि जो व्यक्ति दो दिन पहले तक महाराष्ट्र की जिम्मेदारी संभाल रहा था, रोज सैकड़ों लोगों की मदद कर रहा था और दिन-रात राज्य के विकास के बारे में सोच रहा था, वो अचानक कैसे चला गया? इस सवाल ने उनके मन को पूरी तरह झकझोर दिया है।
रोहित पवार ने नियति से सवाल करते हुए लिखा कि अगर किसी को ले जाना ही था, तो लाखों लोगों के सपनों का सहारा क्यों छीना गया? उन्होंने इसे लाखों लोगों के सपनों के राख में बदलने जैसा बताया।
पोस्ट के अंत में उन्होंने अजित पवार से भी शिकायत जताई। लिखा कि उनके जाने के बाद महाराष्ट्र शोक में डूबा है, हर आंख नम है और हर दिल भारी। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि काश अजित दादा अपनी वही सख्त आवाज में नियति को भी डांट देते।
अस्थियां एकत्र करते समय रोहित पवार को ऐसा महसूस हुआ जैसे अजित पवार फीनिक्स पक्षी की तरह राख से फिर उठ खड़े होंगे और कहेंगे – “रो क्यों रहे हो? उठो, काम पर लगो, महाराष्ट्र के लिए अभी बहुत कुछ करना है।”
मा. अजितदादांनी जिथं विकासरुपी फुलांची बाग फुलवली तिथंच त्यांची राख सावडण्याची वेळ येईल, असं कधी स्वप्नातही आलं नाही.. पण नियतीच्या क्रूर खेळापुढं कुणाचं काही चालत नाही.. अजितदादांची ती दुर्दैवी बातमी आल्यापासून अद्यापपर्यंत डोकं सुन्न आहे… मन बर्फाप्रमाणे थिजलंय.. काय झालं, कसं… pic.twitter.com/vxD2KKfybi
— Rohit Pawar (@RRPSpeaks) January 30, 2026
पोस्ट का अंत उन्होंने बेहद भावुक पंक्तियों के साथ किया – “दादा, कहां खो गए आप? आपको कसकर गले लगाना है…”
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