रूस-यूक्रेन युद्ध: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध लगातार और अधिक भयावह रूप लेता जा रहा है। युद्ध समाप्त होने के कोई ठोस संकेत फिलहाल दिखाई नहीं दे रहे हैं। इसी बीच रूस ने यूक्रेन पर अब तक के सबसे खतरनाक हमलों में से एक को अंजाम दिया है। रूस ने अपनी अत्याधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइल के जरिए पोलैंड की सीमा के पास स्थित एक यूक्रेनी शहर को निशाना बनाया, जिससे इलाके में भारी तबाही की खबरें सामने आई हैं।
हाइपरसोनिक मिसाइल से रूस का बड़ा हमला
जानकारी के अनुसार, रूस ने इस हमले में अपनी अत्यंत घातक ओरशेनिक हाइपरसोनिक मिसाइल का इस्तेमाल किया। ये मिसाइल आवाज की गति से करीब 10 गुना तेज रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम है, जिससे इसे रोक पाना लगभग असंभव माना जाता है। इस मिसाइल हमले के बाद संबंधित यूक्रेनी शहर में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है और कई इमारतों के क्षतिग्रस्त होने की आशंका जताई जा रही है।
ओरशेनिक मिसाइल क्यों है इतनी खतरनाक?
ओरशेनिक मिसाइल रूस की सबसे आधुनिक और घातक हाइपरसोनिक हथियार प्रणालियों में गिनी जाती है। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
10 मैक (Mach) से अधिक की रफ्तार
5,000 किलोमीटर से ज्यादा की मारक क्षमता
आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम
बड़े क्षेत्र में भारी तबाही मचाने की क्षमता
इस मिसाइल की लंबी रेंज को देखते हुए ये दावा किया जा रहा है कि रूस पूरे यूरोप को अपनी जद में लेने की सामर्थ्य रखता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और बढ़ गई है।
यूक्रेनी शहर पर रूस का कब्जा!
कुछ रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया जा रहा है कि रूस की सेना ने यूक्रेन के एक और अहम शहर लीव पर नियंत्रण कर लिया है। हालांकि इसको लेकर आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है, लेकिन अगर ये खबर सही साबित होती है तो ये यूक्रेन के लिए एक बड़ा झटका माना जाएगा।
हमले से पहले जेलेंस्की की चेतावनी
गौरतलब है कि इस बड़े हमले से कुछ समय पहले ही यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने एक संभावित बड़े रूसी हमले की आशंका जताई थी। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर नागरिकों से अपील की थी कि वे सुरक्षित स्थानों पर रहें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें।
बढ़ता तनाव, दुनिया की बढ़ी चिंता
रूस द्वारा पोलैंड सीमा के नजदीक हमला किए जाने से न केवल यूक्रेन बल्कि नाटो देशों की चिंता भी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात ऐसे ही बिगड़ते रहे, तो ये संघर्ष और अधिक देशों को अपनी चपेट में ले सकता है।
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