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Sunita Jamgade Crosses LoC to Pakistan: नागपुर की सुनीता जामगड़े ने LoC पार कर पाकिस्तान में प्रवेश किया, अब जासूसी के आरोपों का सामना

Sunita Jamgade Crosses LoC to Pakistan: नागपुर की सुनीता जामगड़े ने LoC पार कर पाकिस्तान में प्रवेश किया, अब जासूसी के आरोपों का सामना

Sunita Jamgade Crosses LoC to Pakistan: नागपुर की सड़कों पर साड़ियां बेचने वाली 43 वर्षीय सुनीता भोलेश्वर जामगड़े का नाम आज हर जगह चर्चा में है। यह कहानी किसी फिल्म से कम नहीं, जिसमें एक सामान्य महिला अचानक अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंच गई। सुनीता जामगड़े, जिन्हें सुनीता जामगड़े (Sunita Jamgade) के नाम से जाना जाता है, ने 14 मई 2025 को लद्दाख के करगिल में नियंत्रण रेखा (Line of Control) पार की और पाकिस्तान में प्रवेश कर लिया। इस घटना ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पुलिस, सेना और खुफिया एजेंसियों को भी चौंका दिया। आखिर क्या वजह थी कि एक मां अपने 12 साल के बेटे को होटल में छोड़कर सीमा पार कर गई? अब, जब उन्हें 23 मई को अटारी-वाघा सीमा पर भारत को सौंप दिया गया, तो सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह जासूसी का मामला है या कुछ और?

सुनीता की कहानी तब शुरू हुई जब वे अपने बेटे के साथ 4 मई को नागपुर से निकलीं। परिवार को बताया कि उन्हें अमृतसर में किसी अदालती काम के लिए जाना है। लेकिन इसके बजाय, वे करगिल पहुंचीं, जो नियंत्रण रेखा (Line of Control) के पास बसा एक संवेदनशील क्षेत्र है। 9 मई को करगिल के हुंदरमन गांव में एक होटल में रुकने के बाद, सुनीता ने 14 मई को अपने बेटे को अकेला छोड़ दिया और सीमा पार कर ली। उनके बेटे ने होटल कर्मचारियों को बताया कि उनकी मां गायब हो गई हैं, जिसके बाद पुलिस ने तलाश शुरू की। बच्चे को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) की देखरेख में रखा गया, और अब उसे नागपुर में परिवार के पास वापस लाया जा रहा है।

पाकिस्तानी अधिकारियों ने सुनीता को पकड़ लिया और नौ दिन तक हिरासत में रखा। 23 मई को, अटारी-वाघा सीमा पर एक औपचारिक फ्लैग मीटिंग के दौरान, पाकिस्तान रेंजर्स ने उन्हें भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंप दिया। BSF ने सुनीता को अमृतसर पुलिस को सौंपा, और अब नागपुर पुलिस की एक चार सदस्यीय टीम, जिसमें दो महिला कॉन्स्टेबल शामिल हैं, उन्हें वापस नागपुर ला रही है। नागपुर के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (जोन V) निकेतन कदम ने बताया कि सुनीता से पूछताछ की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनकी मंशा क्या थी।

सुनीता के इस कदम ने कई सवाल खड़े किए हैं। लद्दाख के पुलिस महानिदेशक डॉ. एस डी सिंह जमवाल ने खुलासा किया कि सुनीता गायब होने से पहले पाकिस्तानी नागरिकों के संपर्क में थीं। उनके फोन में दो नंबर मिले, जिन्हें ‘जुल्फिकार दूबानी’ और ‘पाकिस्तानी चर्च असिफ मसकुन’ के नाम से सेव किया गया था। ये नंबर गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र से थे, और व्हाट्सएप के जरिए उनसे बातचीत हो रही थी। इस वजह से अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत उनके खिलाफ जीरो FIR दर्ज की, जिसे अब नागपुर के कपिल नगर पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित किया गया है।

सुनीता की कहानी में एक और परत तब जुड़ी जब उनके परिवार ने बताया कि वे मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। पहले एक नर्स के रूप में काम करने वाली सुनीता ने बाद में घर-घर जाकर कपड़े बेचना शुरू किया था। उनके रिश्तेदारों के अनुसार, वे कई सालों से मानसिक अस्थिरता और भ्रम की स्थिति में थीं और नागपुर के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। 2007 में उन्होंने परिवार की मर्जी के खिलाफ शादी की थी, और 2020 में उनका तलाक हो गया। इसके बाद, वे कुछ समय के लिए मुंबई के मीरा रोड पर रहीं, लेकिन फिर नागपुर लौट आईं।

यह पहली बार नहीं था जब सुनीता ने सीमा पार करने की कोशिश की। इससे पहले अप्रैल में, उन्होंने अपने बेटे के साथ अटारी सीमा के रास्ते पाकिस्तान जाने की कोशिश की थी। उस समय BSF ने उन्हें रोक लिया और पूछताछ के बाद अमृतसर पुलिस को सौंप दिया। उनकी इन कोशिशों ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया, और अब उनके खिलाफ जासूसी के संभावित आरोप लगाए जा सकते हैं। पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या सुनीता ने जानबूझकर सीमा पार की थी, या उनकी मानसिक स्थिति ने उन्हें ऐसा करने के लिए प्रेरित किया।

सुनीता का मामला भारत-पाकिस्तान सीमा पर होने वाली उन घटनाओं में से एक है, जो समय-समय पर चर्चा में आती हैं। निकेतन कदम ने बताया कि ऐसी घटनाएं, खासकर अनजाने में सीमा पार करने की, असामान्य नहीं हैं। ऐसी स्थितियों में BSF और पाकिस्तान रेंजर्स के बीच फ्लैग मीटिंग के जरिए मामला सुलझाया जाता है। लेकिन सुनीता के मामले में, उनकी पाकिस्तानी नागरिकों से बातचीत और बार-बार सीमा पार करने की कोशिशों ने इसे जटिल बना दिया है।

हुंदरमन गांव, जहां से सुनीता ने सीमा पार की, वह नियंत्रण रेखा के बेहद करीब है। यह क्षेत्र अपनी खूबसूरती और रणनीतिक महत्व के लिए जाना जाता है। करगिल पुलिस ने सुनीता की तलाश में ड्रोन और स्निफर डॉग्स का इस्तेमाल किया, और खुफिया ब्यूरो (IB) ने नागपुर में उनके परिवार और पृष्ठभूमि की जांच की। एक स्थानीय व्यक्ति को भी हिरासत में लिया गया, जिसने सुनीता को गांव तक छोड़ा था। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या वह व्यक्ति उनकी योजना में शामिल था।

सुनीता की कहानी ने सोशल मीडिया पर भी खूब ध्यान खींचा। कुछ लोग इसे मानसिक स्वास्थ्य से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे सुरक्षा चूक मान रहे हैं। एक खबर के अनुसार, सुनीता ने एक पाकिस्तानी पादरी से ऑनलाइन मुलाकात की थी, जिसके प्रेम में पड़कर उन्होंने यह कदम उठाया। हालांकि, यह जानकारी अभी प्रारंभिक है और पूरी जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।

अब, जब सुनीता नागपुर लौट रही हैं, तो उनके सामने कई सवाल खड़े हैं। क्या वे वाकई जासूसी में शामिल थीं, या यह उनकी मानसिक अस्थिरता का नतीजा था? उनकी कहानी न केवल एक परिवार की चिंता को दर्शाती है, बल्कि सीमा सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य जैसे गंभीर मुद्दों को भी सामने लाती है।

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