देश-विदेश

ईरान की बर्फीली चोटियों पर ‘सर्जिकल रेस्क्यू’: 7000 फीट की ऊंचाई, 36 घंटे का मौत से संघर्ष और अमेरिकी कमांडो का हैरतअंगेज मिशन

ईरान
Image source - Web

मिडिल ईस्ट का आसमान एक बार फिर बारूद की गंध से भर गया है। ईरान के हवाई क्षेत्र में अमेरिकी F-15 फाइटर जेट के क्रैश होने के बाद शुरू हुआ 36 घंटे का हाई-वोल्टेज ड्रामा एक ऐसे रेस्क्यू ऑपरेशन के साथ समाप्त हुआ, जिसे इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज किया जाएगा। पश्चिमी ईरान के दुर्गम पहाड़ों और दुश्मन की सरजमीं के बीच से अपने पायलट को जिंदा निकाल लाना अमेरिका के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।

1. पायलट का जांबाज सफर: 55 किमी का पैदल सफर और पहाड़ों में पनाह
क्रैश के बाद जब दुनिया यह मान रही थी कि पायलट या तो मारा गया या कैद कर लिया गया, तब उस जांबाज ने मौत को मात देने की पटकथा लिखी।

* अजेय साहस: घायल होने के बावजूद पायलट पश्चिमी ईरान के बोयर-अहमद क्षेत्र के बर्फीले रास्तों पर करीब 55 किलोमीटर तक पैदल चला।
* प्राकृतिक सुरक्षा: ईरानी रडार और गश्ती दलों से बचने के लिए उसने 7,000 फीट ऊंचे ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों को अपनी ढाल बनाया। 36 घंटों तक बिना भोजन और उचित चिकित्सा के वह अमेरिकी स्पेशल फोर्स के सिग्नल का इंतजार करता रहा।

2. ‘ऑपरेशन रेस्क्यू’: 12 फाइटर जेट्स और चॉपर्स का सुरक्षा कवच
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मिशन की निगरानी की। जैसे ही पायलट की लोकेशन ट्रेस हुई, अमेरिकी एयरफोर्स ने पूरी ताकत झोंक दी।

* हवाई घेराबंदी: पायलट को सुरक्षित निकालने के लिए 12 से अधिक अत्याधुनिक फाइटर जेट्स और कॉम्बैट चॉपर्स ने ईरानी हवाई सीमा के पास एक सुरक्षा घेरा बनाया।
* स्पेशल फोर्स की एंट्री: अमेरिकी स्पेशल फोर्स के कमांडो ने बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पायलट को एयरलिफ्ट किया और सुरक्षित कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य अस्पताल पहुंचाया। ट्रम्प ने इसे “इतिहास का सबसे साहसिक और सफल ऑपरेशन” करार दिया है।

3. ईरान का पलटवार: “यह रेस्क्यू नहीं, केवल एक कहानी है”
वहीं दूसरी ओर, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने अमेरिका के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक काल्पनिक कहानी बताया है।

* विमान तबाही का दावा: IRGC ने दावा किया है कि ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम ने अमेरिका को उसकी औकात दिखा दी है और कम से कम 7 अमेरिकी विमानों को मार गिराया है।
* मनोवैज्ञानिक युद्ध: ईरानी कमांडरों का कहना है कि ट्रम्प हार को छिपाने के लिए रेस्क्यू की ‘फर्जी’ गौरवगाथा सुना रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि अमेरिका ईरान की डिफेंस पावर का स्वाद चख चुका है।

4. युद्ध की आहट? तनाव चरम पर
पायलट के रेस्क्यू ने जहां अमेरिकी खेमे में जोश भर दिया है, वहीं ईरान की आक्रामकता ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। दुनिया को पता है कि यदि ईरान के ‘7 विमान तबाही’ के दावे में सच्चाई है, तो यह संघर्ष एक पूर्ण युद्ध (Full-scale War) में बदल सकता है। फिलहाल, वाशिंगटन और तेहरान के बीच शब्दों के बाणों के साथ-साथ हथियारों की गर्जना भी तेज हो गई है।

साहस और संप्रभुता की लड़ाई
यह मिशन केवल एक पायलट की जान बचाने तक सीमित नहीं था; यह अमेरिका की ‘ग्लोबल रीच’ और ईरान की ‘क्षेत्रीय ताकत’ के बीच वर्चस्व की जंग थी। एक तरफ घायल पायलट का अदम्य साहस है, तो दूसरी तरफ दोनों देशों के दावे-प्रतिदावे। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह घटना शांति की ओर जाएगी या एक बड़े विनाशकारी युद्ध की प्रस्तावना बनेगी।
हमने अपने नायक को मौत के मुंह से निकाला है, अब हिसाब चुकता करने की बारी हमारी है।” — वाशिंगटन से एक कड़ा संदेश

ये भी पढ़ें: होर्मुज से ट्रम्प की ‘विदाई’, अब ब्रिटेन के हाथ में कमान: क्या 35 देशों का गठबंधन तोड़ पाएगा ईरान की नाकाबंदी? भारत की बढ़ी भूमिका!

You may also like