मुंबई

मासूमों की सुरक्षा से ‘खिलवाड़’: मुंबई RTO की स्ट्राइक, 139 स्कूल बसें दोषी; लगा ₹7 लाख का जुर्माना

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मुंबई की सड़कों पर दौड़ती स्कूल बसें अब केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि अभिभावकों के डर का कारण बनती जा रही हैं। नियमों को ठेंगा दिखाकर बच्चों की जिंदगी दांव पर लगाने वाले बस मालिकों के खिलाफ मुंबई सेंट्रल और वडाला क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) ने एक महीने का विशेष अभियान चलाकर कड़ा संदेश दिया है। इस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले और चिंताजनक हैं।

1. आंकड़ों में लापरवाही: हर तीसरी बस ‘अनफिट’
आरटीओ द्वारा एक महीने तक चलाए गए इस सघन चेकिंग अभियान के आंकड़े बताते हैं कि स्कूलों और बस ऑपरेटरों ने नियमों को कितनी हल्के में लिया है:

* कुल जांच: 393 स्कूल बसें।
* दोषी पाई गई बसें: 139 (लगभग 35% बसें नियमों का उल्लंघन कर रही थीं)।
* जुर्माना: बस मालिकों पर कुल 7 लाख रुपये का दंड लगाया गया है।

2. सुरक्षा नियमों की वो 5 बड़ी धज्जियां, जो जांच में खुलीं
आरटीओ की जांच के दौरान सुरक्षा से जुड़ी ऐसी खामियां मिलीं जो किसी भी बड़े हादसे को न्यौता दे सकती थीं:

* महिला सहायकों का अभाव: नियमों के अनुसार स्कूल बस में महिला अटेंडेंट का होना अनिवार्य है, लेकिन कई बसों में यह नदारद थी।
* रंग और पहचान का संकट: नियमानुसार स्कूल बस का रंग पीला होना चाहिए और उस पर ‘स्कूल बस’ का स्पष्ट बोर्ड होना चाहिए, ताकि ट्रैफिक में उसे प्राथमिकता मिले। जांच में कई बसें बिना बोर्ड और दूसरे रंगों की पाई गईं।
* बिना लाइसेंस का ‘सफर’: सबसे गंभीर बात यह रही कि कई विद्यार्थी ऐसी बसों में ले जाए जा रहे थे जिनके पास वैध कमर्शियल परमिट या लाइसेंस ही नहीं था।
* फिटनेस और दस्तावेज: कई वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट और बीमा जैसे आवश्यक दस्तावेज एक्सपायर हो चुके थे।
* क्षमता से अधिक बच्चे: बसों में बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरने के मामले भी सामने आए हैं।

3. RTO का ‘अल्टीमेटम’: अब समझौता नहीं होगा
वडाला और मुंबई सेंट्रल आरटीओ प्रशासन ने इस कार्रवाई के बाद स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिकों को अंतिम चेतावनी जारी की है।
विद्यार्थियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमने स्पष्ट कर दिया है कि यदि नियमों का पालन नहीं हुआ, तो केवल जुर्माना ही नहीं बल्कि बसों के रजिस्ट्रेशन रद्द करने और काली सूची (Blacklist) में डालने की कार्रवाई की जाएगी।” — आरटीओ अधिकारी

सतर्कता ही सुरक्षा है
आरटीओ का यह अभियान सराहनीय है, लेकिन 139 बसों का दोषी पाया जाना यह दर्शाता है कि नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। केवल 7 लाख का जुर्माना काफी नहीं है; जरूरत इस बात की है कि स्कूल प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी समझे।

अभिभावकों को भी चाहिए कि वे अपने बच्चे को जिस बस में भेज रहे हैं, उसकी फिटनेस और ड्राइवर-हेल्पर की जानकारी स्वयं जांचें। सुरक्षा केवल आरटीओ की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक सामूहिक जवाबदेही है।

याद रखें: एक छोटी सी लापरवाही किसी मासूम की जान पर भारी पड़ सकती है। आरटीओ की यह ‘सफाई’ जारी रहनी चाहिए ताकि मुंबई की सड़कें बच्चों के लिए सुरक्षित बनी रहें।

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