देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर से एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल के सेवन से अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग बीमार होकर अस्पतालों में भर्ती हुए हैं। इस घटना ने नगर प्रशासन, स्वास्थ्य व्यवस्था और पेयजल आपूर्ति प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डायरिया के प्रकोप से बिगड़े हालात
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने के कारण डायरिया का प्रकोप फैल गया। प्रशासन के अनुसार, अब तक 212 मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से करीब 50 लोगों को उपचार के बाद छुट्टी दी जा चुकी है। बाकी मरीजों का इलाज अभी जारी है।
ये क्षेत्र मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र इंदौर-1 में आता है, जिससे इस मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।
मीडिया के सवाल पर मंत्री का तीखा जवाब
बुधवार को जब इस मामले को लेकर मीडिया ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सवाल किया, तो बातचीत के दौरान उनका रुख अचानक बदल गया। पहले कुछ समय तक उन्होंने संयम से जवाब दिए, लेकिन जब उनसे निजी अस्पतालों के इलाज का भुगतान न मिलने और क्षेत्र में सुरक्षित पेयजल व्यवस्था को लेकर सवाल पूछा गया, तो वो नाराज हो गए।
मंत्री ने सवाल को “फोकट प्रश्न” बताते हुए प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद संवाददाता और मंत्री के बीच बहस हो गई। इस दौरान मंत्री द्वारा आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
वीडियो वायरल होने के बाद मंत्री ने जताया खेद
घटना के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने शब्दों के लिए खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वो और उनकी टीम पिछले दो दिनों से प्रभावित क्षेत्र में लगातार काम कर रहे हैं और बिना सोए हालात सुधारने में जुटे हैं।
अपने बयान में मंत्री ने कहा कि दूषित पानी से उनके क्षेत्र के लोग पीड़ित हैं और कुछ लोगों की जान भी गई है। भावनात्मक स्थिति में मीडिया के एक प्रश्न पर उनके शब्द गलत निकल गए, जिसके लिए उन्होंने माफी मांगी।
विपक्ष ने मांगा इस्तीफा
इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंत्री का वीडियो साझा करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जहरीला पानी पीने से मौतों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन जिम्मेदारी तय करने के बजाय मंत्री पत्रकारों से दुर्व्यवहार कर रहे हैं।
पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की कि नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से तत्काल इस्तीफा लिया जाना चाहिए।
प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि स्वच्छता के लिए देशभर में पुरस्कार पाने वाला शहर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में कैसे विफल रहा। साथ ही, संकट के समय जनप्रतिनिधियों की भाषा और संवेदनशीलता पर भी बहस छिड़ गई है।
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