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मोटापे के खिलाफ ब्रिटेन सरकार का सख्त एक्शन, जंक फूड विज्ञापनों पर लगा बैन!

ब्रिटेन सरकार
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ब्रिटेन सरकार ने बढ़ते मोटापे, खासकर बच्चों में तेजी से फैल रही स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। सोमवार, 5 जनवरी 2026 से देश में जंक फूड के विज्ञापनों पर कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। अब न तो रात 9 बजे से पहले टीवी पर जंक फूड के विज्ञापन दिखेंगे और न ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर किसी भी समय ऐसे विज्ञापन चल पाएंगे।

सरकार का कहना है कि ये कदम बच्चों को अस्वस्थ खान-पान के प्रभाव से बचाने और देश में मोटापे की बढ़ती समस्या पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है।

क्या है नए नियमों का पूरा मामला?

नए नियमों के तहत ऐसे सभी खाद्य उत्पादों के विज्ञापन प्रतिबंधित किए गए हैं जिनमें अधिक फैट, नमक या चीनी की मात्रा पाई जाती है। इसमें पिज्जा, बर्गर, मीठे पेय, मिल्कशेक, रेडी-टू-ड्रिंक कॉफी और मीठे दही ड्रिंक्स जैसे कई प्री-पैकेज्ड प्रोडक्ट्स शामिल हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस फैसले से हर साल बच्चों के खान-पान से करीब 7.2 अरब कैलोरी कम होंगी। इससे न केवल बच्चों में मोटापा घटेगा, बल्कि आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाला बोझ भी कम होगा।

20 हजार बच्चों को मिलेगा फायदा, अरबों की बचत

सरकार का अनुमान है कि इन प्रतिबंधों से मोटापे से जूझ रहे करीब 20 हजार बच्चों की संख्या कम हो सकती है। साथ ही, इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में लगभग 2.7 अरब डॉलर के बराबर लाभ होने की उम्मीद है।

ये फैसला पहली बार दिसंबर 2024 में घोषित किया गया था, जिसे अब औपचारिक रूप से लागू कर दिया गया है। इसके साथ ही कुछ उत्पादों पर विस्तारित शुगर टैक्स भी लगाया गया है, ताकि मीठे और अस्वस्थ पेय पदार्थों की खपत को हतोत्साहित किया जा सके।

स्कूलों के बाहर फास्ट फूड दुकानों पर भी सख्ती

सरकार ने स्थानीय प्रशासन को ये अधिकार भी दे दिया है कि वे स्कूलों के आसपास फास्ट फूड दुकानों को खुलने से रोक सकें। अधिकारियों का कहना है कि शोध से साफ पता चलता है कि विज्ञापन बच्चों की खाने की आदतों और पसंद को कम उम्र में ही प्रभावित करते हैं, जिससे आगे चलकर मोटापा और उससे जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

22% से ज्यादा बच्चे मोटापे के शिकार

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इंग्लैंड में प्राइमरी स्कूल में दाखिला लेने वाले बच्चों में से 22% से अधिक बच्चे पहले से ही मोटापे का सामना कर रहे हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, स्थिति और गंभीर होती जाती है। 11 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते ये आंकड़ा एक-तिहाई से भी ज्यादा हो जाता है।

बच्चों में बढ़ती बीमारियां बनीं चिंता की वजह

अधिकारियों के अनुसार, दांतों में सड़न (टूथ डिके) ब्रिटेन में 5 से 9 वर्ष के बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने का सबसे बड़ा कारण बन चुकी है। ये समस्या सीधे तौर पर अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों और पेय से जुड़ी हुई है।

स्वास्थ्य मंत्री एश्ले डाल्टन ने कहा, “रात 9 बजे से पहले टीवी पर जंक फूड के विज्ञापनों को सीमित करके और ऑनलाइन पेड विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगाकर हम अस्वस्थ खाने के प्रचार को काफी हद तक कम कर सकते हैं।”

उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि ये कदम केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि बीमारियों की रोकथाम पर केंद्रित है, ताकि लोग ज्यादा स्वस्थ जीवन जी सकें और नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) पर दबाव कम हो।

डायबिटीज यूके ने फैसले का किया स्वागत

चैरिटी संस्था डायबिटीज यूके ने भी सरकार के इस फैसले की सराहना की है। संस्था की मुख्य कार्यकारी कोलेट मार्शल ने बताया कि युवाओं में टाइप-2 डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मोटापा टाइप-2 डायबिटीज का बड़ा जोखिम कारक है। ये बीमारी युवाओं में गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है, जिसमें किडनी फेल होना और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा शामिल है।”

ब्रिटेन सरकार का ये कदम साफ संकेत देता है कि अब सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देना प्राथमिकता बन चुका है। जंक फूड विज्ञापनों पर लगाया गया ये बैन आने वाले वर्षों में बच्चों और युवाओं की सेहत सुधारने में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

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