महाराष्ट्र

खाड़ी युद्ध की मार: वाशी मंडी में आलू-प्याज के ढेर, पर आम आदमी की जेब अब भी ढीली; 30% होटल बंद

वाशी मंडी
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ईरान पर अमेरिका और इजराइल के भीषण हमलों ने न केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति को दहलाया है, बल्कि इसका सीधा असर अब आपकी रसोई और थाली पर भी दिखने लगा है। खाड़ी देशों (Gulf Countries) में छिड़ी जंग के कारण भारत से होने वाला निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे वाशी मंडी (APMC) में आलू और प्याज का स्टॉक जरूरत से ज्यादा जमा हो गया है।

1. निर्यात थमा, मंडी में बढ़ी आवक
भारत से दुबई, कुवैत और अन्य खाड़ी देशों को बड़े पैमाने पर आलू और प्याज का निर्यात किया जाता है। युद्ध के कारण समुद्री मार्ग असुरक्षित होने और उड़ानों पर पाबंदी लगने से निर्यात रुक गया है।
* नतीजा: जो माल विदेशों में जाना था, वह अब स्थानीय मंडियों में पहुंच रहा है। वाशी एपीएमसी में आलू और प्याज की गाड़ियों की कतारें लग गई हैं, जिससे थोक बाजार में मांग के मुकाबले आपूर्ति (Supply) बहुत ज्यादा हो गई है।

2. रसोई गैस की किल्लत और होटलों पर ताले
युद्ध के चलते वैश्विक स्तर पर ईंधन की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। भारत में रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत देखी जा रही है।
* 30% होटल बंद: गैस की कमी और आसमान छूती कीमतों के कारण अकेले मुंबई और आसपास के इलाकों में 30 प्रतिशत से ज्यादा छोटे-बड़े होटल और रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं।
* खपत में गिरावट: होटलों के बंद होने से प्याज और आलू की जो बड़ी खपत (Consumption) वहां होती थी, वह लगभग खत्म हो गई है। बाजार में ग्राहक कम हैं और माल ज्यादा।

3. थोक में कीमतें गिरीं, पर रिटेल में ‘लूट’ बरकरार
मंडी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, थोक बाजार में कीमतों में भारी गिरावट आई है, लेकिन इसका फायदा आम ग्राहकों तक नहीं पहुंच रहा है।

वस्तु थोक भाव (APMC) खुदरा भाव (Market) अंतर
प्याज | ₹6 से ₹14 प्रति किलो ₹25 से ₹35 प्रति किलो दोगुने से ज्यादा
आलू | ₹8 से ₹12 प्रति किलो ₹20 से ₹30 प्रति किलो भारी अंतर
थोक व्यापारियों का कहना है कि वे सस्ते दाम पर माल बेचने को तैयार हैं, लेकिन खुदरा दुकानदार (Retailers) अपनी कीमतों में कटौती नहीं कर रहे हैं। बिचौलियों और रिटेलर्स की मनमानी के कारण आम आदमी को सस्ता प्याज नसीब नहीं हो रहा है।

4. किसानों और व्यापारियों की चिंता
एपीएमसी के एक थोक व्यापारी के अनुसार, “अगर निर्यात जल्द शुरू नहीं हुआ और गैस की किल्लत के कारण होटल नहीं खुले, तो मंडी में रखा प्याज सड़ने लगेगा। किसानों को उनकी लागत भी नहीं मिल पा रही है, जबकि ग्राहक अभी भी ऊंचे दाम चुका रहा है।”

पश्चिम एशिया का संकट अब भारत के मध्यम वर्ग की जेब पर भारी पड़ रहा है। एक तरफ ईंधन की कमी है, तो दूसरी तरफ रसद की प्रचुरता के बावजूद बाजार की विसंगतियां आम आदमी को राहत नहीं मिलने दे रही हैं।

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