महाराष्ट्र

MMR की पांच महानगर पालिकाओं में महापौर का रास्ता साफ, ठाणे और कल्याण में ‘शिंदे सेना’ का दबदबा

Thane
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MMR (मुंबई महानगर क्षेत्र) की नौ में से पांच प्रमुख महानगर पालिकाओं में नए महापौर और उपमहापौर के चयन की स्थिति अब पूरी तरह स्पष्ट हो गई है। नामांकन प्रक्रिया के बाद ठाणे, कल्याण-डोंबिवली, मीरा-भायंदर, वसई-विरार और उल्हासनगर में नेतृत्व की कमान किन हाथों में होगी, इसकी तस्वीर उभर कर सामने आ गई है। हालांकि, देश की सबसे अमीर नगर पालिका बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) में महापौर पद को लेकर अभी भी सस्पेंस बरकरार है।

प्रमुख नगर पालिकाओं में नामांकन की स्थिति
महायुति के भीतर हुए समन्वय और क्षेत्रीय दलों की ताकत के अनुसार नामांकन पत्र दाखिल किए गए हैं। प्रमुख उम्मीदवारों की सूची इस प्रकार है:

महानगर पालिकामहापौर उम्मीदवारपार्टी
ठाणेशर्मिला पिंपलोलकरशिवसेना (शिंदे)
कल्याण-डोंबिवलीहर्षाली थविलशिवसेना (शिंदे)
मीरा-भायंदरडिंपल मेहताभाजपा
उल्हासनगरअश्विनी कमलेश निकमशिवसेना (शिंदे)
वसई-विरारअजीव पाटील / प्रफुल्ल सानेबहुजन विकास आघाड़ी (BVA)

सत्ता का समीकरण: शिंदे सेना और भाजपा का तालमेल
ठाणे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का गढ़ माना जाता है, और यहाँ शर्मिला पिंपलोलकर का नाम तय होना शिंदे गुट की पकड़ को और मजबूत करता है। वहीं, कल्याण-डोंबिवली और उल्हासनगर में भी शिवसेना (शिंदे) ने अपने उम्मीदवारों के जरिए स्पष्ट संकेत दिया है कि शहरी क्षेत्रों में उनका दबदबा कायम है। मीरा-भायंदर में भाजपा ने डिंपल मेहता पर भरोसा जताया है, जो पार्टी की स्थानीय रणनीति का हिस्सा हैं।

वसई-विरार में BVA की मजबूती
वसई-विरार क्षेत्र में हितेंद्र ठाकुर के नेतृत्व वाली बहुजन विकास आघाड़ी (BVA) ने एक बार फिर अपनी स्वतंत्र ताकत दिखाई है। अजीव पाटील और प्रफुल्ल साने द्वारा पर्चा दाखिल किए जाने के बाद यहाँ विपक्ष के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं।

मुंबई (BMC) पर अभी भी टिकी हैं निगाहें
जहाँ पांच शहरों में तस्वीर साफ है, वहीं मुंबई महानगर पालिका (BMC) में महापौर को लेकर अभी भी गठबंधन के भीतर विचार-विमर्श का दौर जारी है। महायुति और महाविकास आघाड़ी दोनों ही इस प्रतिष्ठित पद के लिए अपनी सर्वश्रेष्ठ बिसात बिछाने में जुटे हैं।

अगला कदम
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 3 फरवरी को महापौर और उपमहापौर के नामों की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी। इसके बाद इन सभी नगर पालिकाओं में नए प्रशासनिक कार्यकाल की शुरुआत होगी। इन चुनावों के परिणामों का सीधा असर आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों और शहरी विकास परियोजनाओं की गति पर पड़ेगा।

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