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विश्व युद्ध की आहट और तेल का ‘तांडव’: अमेरिका-ईरान युद्ध ने दक्षिण एशिया में मचाया हाहाकार, पाकिस्तान और बांग्लादेश में ‘लॉकडाउन’ जैसे हालात

अमेरिका-ईरान युद्ध
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अमेरिका-ईरान युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भूचाल ला दिया है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में आई अप्रत्याशित उछाल ने न केवल शेयर बाजारों को हिला दिया, बल्कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और बांग्लादेश को आर्थिक पंगुता की कगार पर खड़ा कर दिया है। तेल की कमी और आसमान छूती कीमतों के कारण इन देशों में जनजीवन ठहर सा गया है।

पाकिस्तान: ‘दिवालिया’ होने के डर से कड़े प्रतिबंधों का दौर
पाकिस्तान, जो पहले से ही आर्थिक बदहाली से जूझ रहा था, इस तेल संकट के बाद पूरी तरह से ‘इमरजेंसी मोड’ में आ गया है।

पेट्रोल के दामों में ‘बमबारी’: शहबाज शरीफ सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एकमुश्त 55 रुपये प्रति लीटर की ऐतिहासिक बढ़ोतरी कर जनता की कमर तोड़ दी है।

दफ्तरों और स्कूलों पर ताला: ईंधन बचाने के लिए सरकारी दफ्तर अब हफ्ते में केवल 4 दिन खुलेंगे, जबकि 50% कर्मचारी ‘वर्क फ्रॉम होम’ करेंगे। दो हफ्ते के लिए स्कूलों को बंद कर दिया गया है।

मंत्रियों की ‘तपस्या’ या मजबूरी?: पाक पीएम ने सरकारी वाहनों के ईंधन कोटा में 50% की कटौती की है। साथ ही, अगले दो महीनों तक मंत्रियों और सलाहकारों को वेतन नहीं मिलेगा और इफ्तार पार्टियों पर भी पूर्ण पाबंदी लगा दी गई है।

बांग्लादेश: ऊर्जा ग्रिड बचाने की जद्दोजहद
बांग्लादेश में हालात और भी नाजुक होते जा रहे हैं। वहां ईंधन की कमी अब ‘ऊर्जा अकाल’ का रूप ले रही है।

पंपों पर ‘नो फ्यूल’ के बोर्ड: 9 मार्च से बांग्लादेश के अधिकांश पेट्रोल पंप खाली हो चुके हैं। सड़कों पर गाड़ियों की लंबी कतारें और लोगों की हताशा साफ देखी जा सकती है।

अंधेरे की आहट: ऊर्जा ग्रिड पर बढ़ते दबाव को देखते हुए बिजली बचाने के लिए 10 मार्च से कड़े प्रतिबंध लागू किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थान 20 दिनों के लिए बंद कर दिए गए हैं।

सरकार का रुख: ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू ने स्पष्ट किया है कि ये कदम ‘तैयारी’ का हिस्सा हैं ताकि आने वाले बड़े संकट से बचा जा सके।

क्यों गहराया संकट?
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का सीधा असर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर पड़ा है, जहाँ से दुनिया के कुल तेल का लगभग 20% गुजरता है। आपूर्ति बाधित होने के डर से सट्टेबाजों ने कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है।

विशेषज्ञों की राय: “अगर यह तनाव कम नहीं हुआ, तो दक्षिण एशियाई देशों में मुद्रास्फीति (Inflation) बेकाबू हो जाएगी, जिससे खाद्यान्न संकट और सामाजिक अस्थिरता बढ़ने का खतरा है।”

यह संकट केवल ईंधन की कमी नहीं है, बल्कि एक मानवीय संकट की शुरुआत है। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के लिए आने वाले दिन परीक्षा की घड़ी हैं। अगर कूटनीतिक रास्तों से युद्ध को नहीं रोका गया, तो तेल की यह आग दुनिया के कई और देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भस्म कर सकती है।

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