देश-विदेश

दुनिया ‘ब्लैकआउट’ की दहलीज पर: इजराइल ने तोड़ी ईरान की आर्थिक कमर, जवाब में खाड़ी देशों की रिफाइनरियों पर मिसाइल तांडव

इजराइल
Image Source - Web

तेहरान/तेल अवीव। मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) अब उस मुहाने पर खड़ा है जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नजर नहीं आता। इजराइल द्वारा ईरान के सबसे बड़े ऊर्जा प्रतिष्ठान असलुयेह गैस प्लांट (साउथ पार्स) को निशाना बनाए जाने के बाद, यह युद्ध अब ‘सैन्य ठिकानों’ से निकलकर ‘आर्थिक अस्तित्व’ की लड़ाई बन गया है। ईरान ने इस हमले का जवाब केवल इजराइल को नहीं, बल्कि उसके सहयोगियों और पड़ोसी खाड़ी देशों को मिसाइलों से दहला कर दिया है।

1. आर्थिक महाशक्ति पर प्रहार: इजराइल की नई रणनीति
बुधवार तड़के इजराइली लड़ाकू विमानों ने बुशहर प्रांत स्थित ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया।
* रणनीतिक चोट: यह प्लांट ईरान की कुल गैस आपूर्ति का विशाल हिस्सा कवर करता है। इस हमले का सीधा अर्थ है – ईरान में अंधेरा छाना और उसकी अर्थव्यवस्था को वेंटिलेटर पर लाना।
* इजराइल का रुख: तेल अवीव ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अब ईरान के केवल प्यादों (प्रोक्सी) को नहीं, बल्कि असली खिलाड़ी के ‘खजाने’ को नष्ट करेगा।

2. खाड़ी देशों के लिए ‘कयामत की चेतावनी’
इजराइली हमले से बौखलाए ईरान ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया के होश उड़ा दिए हैं। ईरान ने अपनी सैटेलाइट इमेज जारी कर उन ठिकानों को चिन्हित किया है जो वैश्विक तेल आपूर्ति का केंद्र हैं।

* निशाने पर रिफाइनरियां: सऊदी अरब की समरेफ रिफाइनरी, जुबैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, यूएई की अल हसन गैस फील्ड और कतर के प्लांट अब ईरानी मिसाइलों के सीधे निशाने पर हैं।
* मिसाइल तांडव शुरू: चेतावनी महज शब्दों तक सीमित नहीं रही। ईरान ने मल्टीपल वॉरहेड (एक साथ कई धमाके करने वाली) मिसाइलों से सऊदी, कुवैत और यूएई के क्षेत्रों में प्रहार कर दिया है। यह संदेश है कि यदि ईरान जलेगा, तो वह पूरे मिडिल ईस्ट की ऊर्जा शक्ति को साथ लेकर डूबेगा।

3. ‘किल लिस्ट’ और नेतृत्व का संकट
इजराइल ने इस बार ईरान की सैन्य और खुफिया कमान को जड़ से उखाड़ने का बीड़ा उठाया है।
* इंटेलिजेंस मिनिस्टर का खात्मा: ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब की हत्या इजराइल की श्रेष्ठ खुफिया रणनीति का प्रमाण है।
* सफाया अभियान: बीते 24 घंटों में तीन शीर्ष अधिकारियों की मौत ने ईरान के भीतर डर और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है। इजराइल का स्पष्ट आदेश है—”हर ईरानी अधिकारी को निशाना बनाओ।”

4. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा
यह युद्ध अब केवल जमीन कब्जाने की जंग नहीं है, बल्कि यह ‘पेट्रोलियम पॉलिटिक्स’ का सबसे खतरनाक दौर है।
* अमेरिका की मजबूरी: अपने सहयोगी खाड़ी देशों पर होते हमलों को देख अमेरिका अब मूकदर्शक नहीं रह सकता। वाशिंगटन के इस युद्ध में कूदने का मतलब है—सीधा रूस और चीन के समीकरणों को चुनौती।
* महंगाई का बम: यदि सऊदी और यूएई की रिफाइनरियों को नुकसान पहुँचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $200 प्रति बैरल पार कर सकती हैं, जिससे भारत समेत पूरी दुनिया में हाहाकार मच जाएगा।

5. निष्कर्ष: क्या हम तीसरे विश्व युद्ध में हैं?
लेबनान से लेकर यमन और अब सऊदी-कतर की सीमाओं तक फैलती यह आग संकेत है कि तृतीय विश्व युद्ध की पटकथा लिखी जा चुकी है। एक तरफ इजराइल की ‘शून्य सहिष्णुता’ (Zero Tolerance) की नीति है, तो दूसरी तरफ ईरान का ‘आत्मघाती पलटवार’। दुनिया अब शांति की अपील नहीं, बल्कि महाविनाश की आहट सुन रही है

ये भी पढ़ें: ड्रैगन की दहाड़ और ताइवान की ढाल: एशिया में युद्ध के बादल, ट्रंप की बीजिंग यात्रा पर संशय और ‘टी-डोम’ की तैयारी

You may also like