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तिरुपति बालाजी के लड्डू में मिलावट: 320 रुपये के चक्कर में कैसे बिगड़ा स्वाद?

तिरुपति बालाजी के लड्डू में मिलावट: 320 रुपये के चक्कर में कैसे बिगड़ा स्वाद?

तिरुपति बालाजी के लड्डू में मिलावट: क्या आपने कभी सोचा था कि भगवान के प्रसाद में भी मिलावट हो सकती है? हां, ऐसा ही कुछ हुआ है तिरुपति बालाजी (Tirupati Balaji) के मशहूर लड्डुओं के साथ। इस खबर ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। आइए जानते हैं कि आखिर क्या है पूरा मामला और कैसे 320 रुपये के चक्कर में इतना बड़ा बवाल मच गया।

लड्डुओं में क्या मिला?

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि तिरुपति बालाजी (Tirupati Balaji) के लड्डुओं में जानवरों की चर्बी और मछली का तेल मिला हुआ है। यह बात उन्होंने ऐसे ही नहीं कही, बल्कि इसके सबूत के तौर पर साइंटिफिक लैब की रिपोर्ट भी दिखाई है। सोचिए, जिस प्रसाद को लोग भगवान का आशीर्वाद मानते थे, उसमें ऐसी चीजें मिलीं। यह खबर सुनकर करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।

320 रुपये का चक्कर

अब सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? जवाब है – सस्ता घी खरीदने की जिद। सरकार और उसके अफसर 320 रुपये प्रति किलो के हिसाब से घी खरीदने पर अड़े थे। सस्ते में घी खरीदने के चक्कर में उन्होंने ऐसा घी खरीद लिया, जिसमें असल में घी कम और जानवरों की चर्बी ज्यादा थी। बस, यहीं से शुरू हुआ यह बड़ा विवाद।

तिरुपति बालाजी (Tirupati Balaji) के लड्डू की खास बात

तिरुपति के लड्डू सिर्फ लड्डू नहीं हैं। लोग इन्हें भगवान का साक्षात् प्रसाद मानते हैं। कहा जाता है कि इन लड्डुओं का स्वाद कहीं और नहीं मिलता। यहां तक कि कई लोग मानते हैं कि अगर आप तिरुपति गए और यह प्रसाद नहीं खाया, तो आपको दर्शन का पूरा पुण्य नहीं मिलेगा। सोचिए, इतनी बड़ी आस्था वाले प्रसाद में मिलावट की बात सामने आई है।

लड्डू बनाने का खास तरीका

तिरुपति के लड्डू बनाने का तरीका बहुत खास है। यहां 600 ब्राह्मणों की एक टीम दिन-रात काम करती है। रोज करीब साढ़े तीन लाख लड्डू बनाए जाते हैं। इनमें इस्तेमाल होने वाला हर सामान बड़ी सावधानी से चुना जाता है। केसर कश्मीर से मंगाया जाता है, तो इलायची केरल से आती है। यहां तक कि लड्डू बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला पानी भी एक खास तालाब से लिया जाता है।

300 साल से नहीं बदला तरीका

सबसे अजीब बात यह है कि तिरुपति के लड्डू बनाने का तरीका पिछले 300 साल से नहीं बदला है। 2009 में तो इन लड्डुओं को GI टैग भी मिल गया था। मतलब यह कि इन लड्डुओं की एक खास पहचान है और इन्हें सिर्फ तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर में ही बनाया जा सकता है।

क्या होगा आगे?

अब जबकि यह बड़ा खुलासा हो गया है, लोग जानना चाहते हैं कि आगे क्या होगा। क्या इस मामले की जांच होगी? क्या दोषियों को सजा मिलेगी? और सबसे बड़ा सवाल – क्या लोगों का टूटा हुआ भरोसा फिर से जुड़ पाएगा? फिलहाल तो यह मामला गरमाया हुआ है और लोग इंतजार कर रहे हैं कि कब इस पर कोई ठोस कार्रवाई होगी।

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