महाराष्ट्र

Nalasopara में दर्दनाक घटना: कुत्ते के काटने के 5 महीने बाद 9 वर्षीय बच्ची की रेबीज से मौत

Nalasopara
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महाराष्ट्र के पालघर जिले के Nalasopara से एक बेहद दुखद और चेतावनी देने वाली घटना सामने आई है। यहां 9 साल की मासूम बच्ची कशिश साहनी की रेबीज जैसी घातक बीमारी से मौत हो गई। हैरानी की बात ये है कि बच्ची को कुत्ते ने करीब पांच महीने पहले काटा था, लेकिन समय पर टीकाकरण न होने के कारण ये संक्रमण जानलेवा साबित हुआ।

कैसे हुआ हादसा?

मिली जानकारी के अनुसार, कशिश अपने दादाजी के साथ घर के पास टहलने निकली थी। इसी दौरान उसने एक कुत्ते को बिस्किट खिलाने की कोशिश की, तभी कुत्ते ने उसे काट लिया। परिवार उसे तुरंत डॉक्टर के पास लेकर पहुंचा, लेकिन इंजेक्शन के डर से बच्ची ने टीका लगवाने से मना कर दिया।

परिवार ने भी बच्ची के डर को देखते हुए उसे बिना एंटी-रेबीज वैक्सीन दिलवाए घर वापस ले आया, जो आगे चलकर एक गंभीर गलती साबित हुई।

लापरवाही बनी जानलेवा

घटना के अगले दिन घाव सूखने लगा, जिससे परिजनों को लगा कि खतरा टल गया है। लेकिन रेबीज वायरस शरीर के भीतर धीरे-धीरे सक्रिय होता रहा। ये बीमारी अक्सर देर से लक्षण दिखाती है, जिससे लोग भ्रम में आ जाते हैं।

करीब 5 महीने बाद अचानक कशिश की तबीयत बिगड़ने लगी। उसकी आंखें लाल हो गईं और शरीर में असामान्य लक्षण दिखाई देने लगे।

अस्पताल में इलाज के दौरान मौत

बच्ची की हालत गंभीर होते देख परिजन उसे पहले स्थानीय अस्पताल लेकर गए, जहां से उसे मुंबई के कस्तूरबा अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद रविवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

स्वास्थ्य विभाग हुआ अलर्ट

इस घटना के बाद वसई-विरार नगर निगम (VVMC) का स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। अधिकारियों ने बच्ची के घर और आसपास के क्षेत्र का दौरा किया है। साथ ही, उसके संपर्क में आए परिवार के सदस्यों, पड़ोसियों और अन्य लोगों की जांच की जा रही है ताकि संक्रमण के खतरे को रोका जा सके।

विशेषज्ञों की चेतावनी

डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि जानवर के काटने को कभी भी हल्के में न लें। तुरंत घाव को साबुन और पानी से साफ करें। बिना देरी किए एंटी-रेबीज टीकाकरण करवाएं और पूरा वैक्सीन कोर्स जरूर पूरा करें, क्योंकि रेबीज एक घातक बीमारी है, जिसके लक्षण दिखने के बाद इलाज लगभग संभव नहीं होता।

ये घटना एक बड़ी चेतावनी है कि छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा बन सकती है। समय पर इलाज और जागरूकता ही ऐसे मामलों में जीवन बचाने का एकमात्र उपाय है।

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