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कर्नाटक में ट्रेनी विमान क्रैश, दोनों पायलट सुरक्षित; ईंधन खत्म होने से करनी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग

कर्नाटक
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कर्नाटक के विजयपुरा जिले में रविवार शाम एक प्राइवेट ट्रेनिंग विमान खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। राहत की बात ये रही कि जमीन पर गिरने से पहले ही दोनों पायलट सुरक्षित बाहर निकल गए। उन्हें हल्की चोटें आई हैं और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

ये हादसा बालेश्वर क्षेत्र के मंगलुरु गांव के पास हुआ। सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा और क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू की गई।

ईंधन की कमी बनी हादसे की वजह

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, विमान में ईंधन की कमी के कारण इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। ये प्लेन साल 1975 में निर्मित सेसना 172 मॉडल था, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर VT-EUC (MSN-17265717) है।

ये विमान रेडबर्ड फ्लाइंग ट्रेनिंग एकेडमी लिमिटेड का था और कलबुर्गी से बेलगावी की ओर प्रशिक्षण उड़ान पर था। बेलगावी एयरपोर्ट से लगभग 100 किलोमीटर पूर्व, बागलकोट के पास एक खेत में इसकी आपात लैंडिंग हुई, जो अंततः क्रैश में बदल गई।

कौन थे विमान में सवार?

विमान में दो लोग सवार थे:

  • कैप्टन कुणाल मल्होत्रा – असिस्टेंट फ्लाइट इंस्ट्रक्टर (AFI)

  • गौतम शंकर पीआर – ट्रेनी पायलट

मंत्रालय के मुताबिक, पायलट इन कमांड (PIC) के पास 734 घंटे का उड़ान अनुभव था।

विमान की तकनीकी स्थिति क्या थी?

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि विमान का एयरवर्थनेस रिव्यू सर्टिफिकेट (ARC) 1 अगस्त 2025 को जारी किया गया था, जो 3 अगस्त 2026 तक वैध है। ARC प्रमाणपत्र ये सुनिश्चित करता है कि संबंधित विमान निरीक्षण के बाद उड़ान के लिए फिट है।

रेडबर्ड फ्लाइट ट्रेनिंग एकेडमी के बेड़े में कुल 48 विमान शामिल हैं और उसका फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) अनुमोदन 22 जुलाई 2030 तक वैध है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने 23 जुलाई 2020 को एकेडमी को FTO के रूप में मान्यता दी थी।

जांच शुरू, DGCA और AAIB करेंगे पड़ताल

मंत्रालय ने बताया कि दुर्घटना की विस्तृत जांच DGCA और एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) द्वारा की जाएगी। जांच में ये स्पष्ट किया जाएगा कि ईंधन प्रबंधन में चूक हुई या कोई अन्य तकनीकी कारण जिम्मेदार था।

हालिया विमान हादसों पर चिंता

पिछले एक महीने में छोटे विमानों से जुड़े तीन हादसे सामने आ चुके हैं। इससे प्रशिक्षण उड़ानों और निजी विमानन सुरक्षा मानकों पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेनिंग फ्लाइट्स में सुरक्षा प्रोटोकॉल और ईंधन प्रबंधन बेहद अहम होते हैं। किसी भी तरह की लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

बड़ा सवाल: क्या सुरक्षा मानकों की समीक्षा होगी?

हालांकि इस हादसे में जानमाल का बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन ये घटना एक चेतावनी जरूर है। पुराने विमानों के संचालन, ईंधन प्रबंधन और प्रशिक्षण प्रक्रियाओं की नियमित समीक्षा की आवश्यकता पर अब चर्चा तेज हो सकती है।

फिलहाल दोनों पायलट सुरक्षित हैं और प्रशासन तकनीकी जांच में जुटा हुआ है। आने वाली रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि ये हादसा मानवीय भूल था या तकनीकी विफलता।

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