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Trump vs Supreme Court: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रम्प के वैश्विक टैरिफ को किया ‘अवैध’ घोषित

Trump vs Supreme Court

Trump vs Supreme Court: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया है जो न केवल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आर्थिक नीतियों के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दिशा बदलने वाला भी है। शुक्रवार को 6-3 के बहुमत से शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि “टैक्स लगाने का अधिकार संसद (कांग्रेस) का है, न कि व्हाइट हाउस का।”

फैसले का आधार: संविधान बनाम कार्यकारी आदेश
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का नेतृत्व करते हुए लिखा कि संविधान निर्माताओं ने जानबूझकर कर लगाने की शक्ति कार्यपालिका (President) को नहीं सौंपी थी। कोर्ट ने माना कि राष्ट्रपति इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का उपयोग करके ‘व्यापार घाटे’ को ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ घोषित नहीं कर सकते ताकि वे एकतरफा टैक्स वसूल सकें।

भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
ट्रम्प की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत भारत विशेष रूप से निशाने पर था।

  • टैरिफ का बोझ: ट्रम्प ने भारत पर 18% टैरिफ लगाया हुआ था (जो पहले 50% तक था)।
  • बेसलाइन टैक्स: अप्रैल 2025 में लगाए गए 10% बेसलाइन और 50% तक के ‘रेसिप्रोकल’ टैरिफ ने वैश्विक सप्लाई चेन को अस्त-व्यस्त कर दिया था।
  • वित्तीय प्रभाव: इस फैसले से पहले ट्रम्प प्रशासन लगभग 133 अरब डॉलर की वसूली कर चुका था। अनुमान था कि अगले दशक में यह आंकड़ा 3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच जाएगा।

कोर्ट में मतभेद और रिफंड की अनिश्चितता
अदालत के भीतर भी विचारधारा की लड़ाई साफ दिखी। जहाँ 6 जजों ने संविधान की रक्षा की बात कही, वहीं जस्टिस सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कावानों ने असहमति जताई।
मुख्य बिंदु विवरण

फैसला 6-3 का बहुमत (टैरिफ रद्द)

बिंदुविवरण
मुख्य तर्ककर लगाने की शक्ति स्पष्ट रूप से कांग्रेस के पास है
वित्तीय स्थितिरिफंड की स्थिति स्पष्ट नहीं, अरबों डॉलर का भविष्य अधर में
ट्रम्प की प्रतिक्रियाफैसले को “शर्मनाक” बताया
ट्रम्प का दावाबैकअप प्लान होने का दावा किया

ट्रम्प का ‘बैकअप प्लान’ और आगे की राह
राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “देशहित के खिलाफ” बताया है। हालांकि उन्होंने एक ‘बैकअप प्लान’ की बात की है, लेकिन कानून विशेषज्ञों का मानना है कि अब उनके पास रास्ते सीमित हैं। अब उन्हें किसी भी नए टैरिफ के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी, जो कि एक जटिल राजनीतिक प्रक्रिया है।

यह फैसला व्यापार युद्ध (Trade War) के इस दौर में वैश्विक बाजारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। भारत जैसे देशों के लिए यह निर्यात (Export) बढ़ाने का एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है, क्योंकि अनिश्चितता के बादल अब छंटने लगे हैं।

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