ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध में अमेरिका की बढ़ती मुश्किलों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को कड़े और अप्रत्याशित कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। युद्ध के मोर्चे पर अपेक्षित सफलता न मिलने से भड़के ट्रम्प ने अमेरिकी सैन्य नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए आर्मी चीफ जनरल रैंडी जॉर्ज को उनके पद से हटाकर तत्काल रिटायरमेंट के आदेश दे दिए हैं। जनरल जॉर्ज का कार्यकाल 2027 तक था, लेकिन युद्ध की बदलती परिस्थितियों ने उन्हें वक्त से पहले ही घर भेज दिया।
सैन्य नेतृत्व में ‘क्लीन स्वीप’
ट्रम्प ने केवल आर्मी चीफ ही नहीं, बल्कि सैन्य पदानुक्रम में शीर्ष पर बैठे दो अन्य वरिष्ठ जनरलों पर भी गाज गिराई है:
* नया नेतृत्व: जनरल रैंडी जॉर्ज की जगह अब क्रिस्टोफर लानेवे को नया आर्मी चीफ नियुक्त किया गया है।
* वरिष्ठ जनरलों की छुट्टी: दो अन्य सीनियर जनरल, डेविड हॉन्डे और विलियम ग्रीन को भी उनके पदों से हटा दिया गया है।
जानकारों का मानना है कि ट्रम्प युद्ध की रणनीति में नया दृष्टिकोण चाहते हैं और पुराने नेतृत्व की ‘रक्षणात्मक’ शैली से संतुष्ट नहीं थे।
इतिहास दोहराया गया: 75 साल बाद ऐसी कार्रवाई
अमेरिकी इतिहास में युद्ध के बीच किसी आर्मी चीफ को हटाना एक अत्यंत दुर्लभ घटना है। यह अमेरिका के इतिहास में केवल दूसरी बार हुआ है:
* 1951 का उदाहरण: इससे पहले कोरियाई युद्ध के दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने जनरल डगलस मैकऑर्थर को पद से हटाया था।
* ट्रम्प का संदेश: इस कदम से ट्रम्प ने स्पष्ट कर दिया है कि वे नतीजों के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और सेना में जवाबदेही तय करने से पीछे नहीं हटेंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ट्रम्प का ‘यूटर्न’
जंग के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति की लाइफलाइन माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य की बंदी पर ट्रम्प के सुर बदलते नजर आ रहे हैं। पहले इसे तुरंत खुलवाने का दावा करने वाले ट्रम्प ने अब स्वीकार किया है कि राह उतनी आसान नहीं है।
थोड़ा वक्त लगेगा, लेकिन हम होर्मुज को खुलवाने में सफल होंगे।” – डोनाल्ड ट्रम्प
उनका यह बयान दर्शाता है कि ईरान ने सामरिक रूप से अमेरिका को कड़ी चुनौती दी है और फिलहाल इस जलमार्ग पर नियंत्रण पाना अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
बौखलाहट या सोची-समझी रणनीति?
रक्षा विशेषज्ञों का एक वर्ग इसे ट्रम्प की बौखलाहट बता रहा है, तो दूसरा इसे एक नई और आक्रामक युद्ध नीति (War Strategy) का हिस्सा मान रहा है। 31 जुलाई और सितंबर की टैरिफ डेडलाइन्स के साथ-साथ अब सैन्य मोर्चे पर यह फेरबदल बताता है कि ट्रम्प प्रशासन 2026 के इस साल को निर्णायक बनाने की कोशिश में है।
क्रिस्टोफर लानेवे के सामने अब चुनौती न केवल युद्ध को संभालने की है, बल्कि सेना के भीतर गिरे हुए मनोबल को फिर से उठाने की भी होगी। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या नेतृत्व परिवर्तन से ईरान युद्ध की दिशा बदलती है या यह संकट और गहराता है।































