ट्रम्प की ‘प्रेशर कूटनीति’: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल में दुनिया को अपनी अनूठी कूटनीति से चौंकाना शुरू कर दिया है। ईरान के साथ परमाणु समझौते को लेकर जिनेवा में चल रही बातचीत के बीच, ट्रम्प ने मध्य पूर्व (Middle East) में 50 से अधिक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान (F-35, F-22, F-16) तैनात कर दिए हैं। यह संदेश साफ है—बातचीत टेबल पर होगी, लेकिन ताकत आसमान में दिखेगी।
कूटनीति का नया चेहरा: सरकारी राजनयिक नहीं, ‘डील गाइज’ पर भरोसा
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प ने पारंपरिक राजनयिकों को किनारे कर सारा दारोमदार अपने दो सबसे भरोसेमंद करीबियों पर डाल दिया है:
- जैरेड कुशनर: ट्रम्प के दामाद और अब्राहम अकॉर्ड्स के वास्तुकार। उनके पास कोई आधिकारिक पद नहीं है, फिर भी वे पर्दे के पीछे सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
- स्टीव विटकॉफ: विशेष राजदूत, जो ट्रम्प की तरह एक कारोबारी दृष्टिकोण रखते हैं।
क्यों चुना इन्हें?
ट्रम्प का मानना है कि अमेरिकी ‘स्टेट डिपार्टमेंट’ का ढांचा बहुत धीमा और जटिल है। वे ऐसे लोगों को चाहते हैं जो सीधे बिजनेस डील की तरह वैश्विक मसलों को सुलझा सकें। यही जोड़ी फिलहाल रूस-यूक्रेन युद्ध और गाजा युद्धविराम के मसलों पर भी सक्रिय है।
जिनेवा वार्ता: ‘गंभीर’ प्रगति बनाम ‘रेड लाइन्स’
ओमान की मध्यस्थता में स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे ‘रचनात्मक’ बताया है। दोनों पक्ष समझौते के ‘मार्गदर्शक सिद्धांतों’ पर सहमत होते दिख रहे हैं।
हालांकि, पेंच अभी फंसा हुआ है:
“ईरान ने अभी तक ट्रम्प की सभी ‘रेड लाइन्स’ को स्वीकार नहीं किया है, विशेषकर परमाणु हथियार निर्माण को स्थायी रूप से बंद करने की शर्त।” जेडी वेंस, अमेरिकी उपराष्ट्रपति
‘बोर्ड ऑफ पीस’: यूरोप ने दिखाई ट्रम्प को आंख
आज वॉशिंगटन में ट्रम्प के महत्वाकांक्षी ‘गाजा पीस बोर्ड’ की पहली बैठक होने जा रही है। ट्रम्प ने 60 देशों को न्योता दिया था, लेकिन खबर है कि केवल 20 से 26 देश ही शामिल हो रहे हैं।
- बड़ा झटका: फ्रांस, ब्रिटेन और इटली जैसे प्रमुख यूरोपीय देशों ने इस बैठक से दूरी बना ली है।
- कारण: यूरोपीय देशों का मानना है कि यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (UN) के विकल्प के रूप में काम करने की कोशिश कर रहा है, जो उन्हें मंजूर नहीं है।
विवादों के साये में ‘प्राइवेट कूटनीति’
कुशनर और विटकॉफ की सक्रियता पर अमेरिका के भीतर ही सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का आरोप है कि:
- कुशनर ने सऊदी अरब और कतर जैसे देशों से अरबों डॉलर का निवेश प्राप्त किया है।
- विटकॉफ परिवार की क्रिप्टो कंपनी में विदेशी निवेश का आना ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) की ओर इशारा करता है।
शक्ति और व्यापार का मेल
डोनाल्ड ट्रम्प की रणनीति स्पष्ट है—वे ईरान को सैन्य ताकत से डराकर उसे एक ऐसी आर्थिक और परमाणु डील के लिए मजबूर करना चाहते हैं जो उनके अनुकूल हो। लेकिन यूरोप का असहयोग और निजी दूतों पर अत्यधिक निर्भरता इस कूटनीति के लिए जोखिम भी पैदा कर सकती है।





























