मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति के कद्दावर नेता अजित पवार के आकस्मिक निधन ने राज्य के सियासी समीकरणों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। वर्तमान में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित गुट) एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जहाँ एक तरफ पार्टी के अस्तित्व को बचाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ शरद पवार खेमे के साथ दोबारा जुड़ने की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
विधायकों में बेचैनी: शरद पवार और सुप्रिया सुले से संपर्क
अजित पवार के निधन के मात्र चार दिनों के भीतर ही उनके गुट के विधायकों में अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना दिखने लगी है। सूत्रों के हवाले से बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है:
- संपर्क की कोशिश: पिछले चार दिनों में अजित गुट के दो दर्जन से ज्यादा विधायकों ने शरद पवार और सुप्रिया सुले से संपर्क साधा है।
- भविष्य की चिंता: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजित पवार के बिना इन विधायकों को आगामी चुनावों में अपनी साख और जीत का संकट सता रहा है।
- गोपनीयता: हालांकि शरद पवार और सुप्रिया सुले के साथ इन विधायकों की क्या बातचीत हुई है, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन यह ‘घर वापसी’ के संकेतों की ओर इशारा कर रहा है।
26 फरवरी को मिल सकता है नया राष्ट्रीय अध्यक्ष
पार्टी के भीतर मची इस उथल-पुथल के बीच संगठन को बिखरने से बचाने के लिए कवायद शुरू हो गई है। अजित पवार की परंपरा को जारी रखते हुए सोमवार को उनके सरकारी आवास पर एक महत्वपूर्ण साप्ताहिक बैठक हुई।
- सुनेत्रा पवार की सक्रियता: अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने मोर्चा संभाल लिया है। सोमवार को हुई बैठक में उन्होंने विधायकों के साथ पार्टी की आगामी रणनीति और संगठनात्मक ढांचे पर गहन चर्चा की।
- अध्यक्ष पद पर मुहर: सूत्रों के अनुसार, बैठक में मौजूद सभी विधायकों ने एक स्वर में सुनेत्रा पवार के नेतृत्व पर सहमति जताई है।
- अंतिम निर्णय: आगामी 26 फरवरी को पार्टी की एक बड़ी बैठक बुलाई गई है, जिसमें आधिकारिक तौर पर सुनेत्रा पवार के नाम पर ‘राष्ट्रीय अध्यक्ष’ के रूप में मुहर लगने की पूरी संभावना है।
सियासी खींचतान और संभावित विकल्प
वर्तमान स्थिति को देखते हुए राकांपा (अजित गुट) के सामने दो ही रास्ते नजर आ रहे हैं:
- स्वतंत्र अस्तित्व: सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पार्टी को एक नई पहचान के साथ आगे बढ़ाना और अजित पवार की विरासत को सहेजना।
- विलय की संभावना: यदि बड़ी संख्या में विधायक शरद पवार खेमे की ओर रुख करते हैं, तो अंततः दोनों गुटों के विलय की स्थिति बन सकती है।राजनीतिक गलियारों की चर्चा: मुंबई की राजनीति में यह सवाल तैर रहा है कि क्या सुनेत्रा पवार उन विधायकों को रोक पाएंगी जो शरद पवार के अनुभव और मार्गदर्शन की ओर वापस लौट रहे हैं?
अजित पवार का जाना केवल एक परिवार की क्षति नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की सत्ता संरचना में एक बड़ा शून्य पैदा करना है। 26 फरवरी को होने वाली बैठक यह तय करेगी कि ‘घड़ी’ का कांटा किस दिशा में घूमेगा और महाराष्ट्र की राजनीति में ‘पवार बनाम पवार’ का अध्याय खत्म होगा या एक नया मोड़ लेगा।




























