बॉम्बे हाई कोर्ट ने 10.5 लाख ट्रामाडोल टैबलेट्स की तस्करी के मामले में दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, कोरियर मैनेजर को राहत देते हुए जमानत दे दी गई है। दरअसल मुंबई कस्टम विभाग की सेंट्रल इंटेलिजेंस यूनिट (CIU) ने पिछले साल फरवरी में एक खेप को रोककर 10 लाख ट्रैमडोल टैबलेट जब्त की थीं। इन टैबलेट्स की कीमत करीब 21 करोड़ रुपये थी और इन्हें दक्षिण सूडान भेजा जा रहा था।
दोषियों को नहीं मिली राहत
जस्टिस एन. जे. जमादार की एकल पीठ ने मुख्य आरोपी कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) गुड़ीपति सुब्रमण्यम और विदेशी नागरिक अहमद सालेह हसन की जमानत याचिका खारिज कर दी।
कोरियर मैनेजर को राहत
कोर्ट ने कोरियर मैनेजर रवींद्र राजाराम कवथंकर को जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि वो इस मामले में शामिल थे या नहीं, इस पर बहस हो सकती है।
क्या है ट्रामाडोल?
ट्रैमडोल एक साइकोट्रोपिक पदार्थ और दर्द निवारक दवा है, जिसका नशे के लिए दुरुपयोग किया जाता है। इसे भारत में अप्रैल 2018 में प्रतिबंधित कर दिया गया था।
ये फैसला महत्वपूर्ण है क्योंकि ये दिखाता है कि कोर्ट ड्रग तस्करी जैसे गंभीर मामलों में सख्त रुख अपना रहा है। हालांकि, कोर्ट ने ये भी माना है कि अगर किसी की संलिप्तता संदिग्ध है, तो उसे राहत दी जा सकती है।
आरोपी कंपनी एम/एस फर्स्ट वेल्थ सॉल्यूशंस कथित तौर पर ट्रैमडोल टैबलेट्स को टैमोल-एक्स-225 (एक कैल्शियम कार्बोनेट टैबलेट) के रूप में गलत तरीके से घोषित करके विदेशों में तस्करी करने की कोशिश कर रही थी।
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